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दरवाजा पीटते हुए मोहित बोले, मुझे बचा लो

Wed, 12 Dec 2018 12:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूूराे जालाैन
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बैरक में जांच पड़ताल करते एसपी जीआरपी पीके मिश्रा। - फोटो : amar ujala
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चार कदम की दूरी पर स्थित थाने में मौजूद मुंशी ने जब गोली चलने व दरवाजा पीटे जाने की आवाज सुनी तो दरोगा मोहित के कमरे की ओर दौड़ा और जैसे ही उसने दरवाजा धक्का देकर खोला तो मोहित वर्दी पहने लहूलुहान हालत में पड़े थे। मुंशी को देखते ही मोहित बोल पड़े कि मुझे बचा लो, जल्दी अस्पताल ले चलो। हैरत की बात तो यह है कि मोहित ने जब अपने सीने में गोली मारी तब पास में सो रहे सिपाही को पता नहीं लगा और जब वह दरवाजा भीतर से पीट रहे थे, तब भी उनका साथी कांस्टेबल अशोक घटना से बेखबर कंबल मुंह तक ओढ़कर सो रहा था।

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इस बाबत एसपी जीआरपी पीके मिश्रा का कहना है कि मोहित ने सीने में सटाकर गोली चलाई, इस कारण आवाज नहीं हो सकी होगी, रही बात दरवाजा पीटने की तो साथी सिपाही गहरी नींद में था, इसलिए हो सकता है कि उसने आवाजें न सुनी हो। फिलहाल जांच पड़ताल की जा रही है। दरोगा का रिवाल्वर और मोबाइल भी जांच के घेरे में है। जिससे भी घटना के खुलासे में मदद मिलेगी।   घटना के बाद मौके पर पहुंचे एसपी ने मोहित के साथी सिपाही अशोक से बंद कमरे में पूछताछ भी की।

सूत्रों की मानें तो अशोक ने घटना के संबंध में साफ इंकार किया है। उसका कहना है कि कब गोली चली और कब दरवाजा पीटा गया, उसे बिल्कुल भी पता नहीं चल सका। उसे तो दूसरे साथियों ने जब जगाया, तब उसे पूरी घटना की जानकारी हो सकी।   दरोगा मोहित जनपद से पहले जीआरपी झांसी में तैनात रहे हैं। जहां जुलाई 2018 बिना किसी सूचना के पंद्रह दिन ड्यूटी से गैरहाजिर रहने पर उन्हें निलंबित भी किया गया था। इसके बाद ही उनकी तैनाती उरई रेलवे स्टेशन पर की गई थी।
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एसपी का कहना है कि सुसाइड के प्रयास की वजह कुछ भी हो सकती है। फिलहाल पुलिस पारिवारिक कारणों के अलावा, क्योंकि मोहित अविवाहित थे तो प्रेम प्रसंग की आशंका से भी इंकार नहीं कर रही है। इसके अलावा किसी तरह का विभागीय उत्पीड़न तो नहीं था, यह भी देखा जाएगा। हालांकि मोहित की ओर से विभाग के प्रति अभी तक कोई शिकायती पत्राचार किसी अधिकारी से नहीं किया गया है।  दरोगा को गोली लगने के बाद साथी उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंचे, जहां से उसे झांसी रेफर किया गया, लेकिन मामला दिल के पास का होने के कारण वहां के डॉक्टरों ने भी हाथ खड़े कर दिए तो जीआरपी इंस्पेक्टर सीधे लखनऊ पहुंचे। जीआरपी सूत्रों की मानें तो सही इलाज मिलने में इतनी लेटलतीफी मोहित की जिंदगी पर भी भारी पड़ सकती थी। 

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