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डिवाइडर से बाइक टकराने पर शिक्षक की मौत, पत्नी घायल

Thu, 24 May 2018 11:56 PM IST
अमर उजाला ब्यूूराे जालाैन
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घर में रोते बिलखते परिजन। - फोटो : amar ujala
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कदौरा। ताहरपुरा गांव के पास एक बाइक अन्ना जानवर से टकराकर डिवाइडर से जा भिड़ी। हादसे में बाइक सवार शिक्षक की मौत हो गई जबकि पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गई। वहीं उनकी मासूम बच्ची हादसे में बाल-बाल बच गई। शिक्षक के हेलमेट के शीशे में गाय का सींग घुस गया था। हालत नाजुक हालत में दोनों को जिला अस्पताल लाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही शिक्षक ने दम तोड़ दिया। वहीं पत्नी को नाजुक हालत में झांसी रेफर कर दिया गया है। शिक्षक पत्नी व बच्चे के साथ बाइक से ससुराल से लौट रहा था।  
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कोंच कोतवाली क्षेत्र के ग्राम क्योलारी निवासी रमेशचंद्र (45) पुत्र रामस्वरूप उसी क्षेत्र के तीतरा गांव में प्राथमिक विद्यालय में अध्यापक था। बुधवार को वह पत्नी संतोषी उर्फ हीरा (42) व 10 माह की मासूम बच्ची नेहा को साथ लेकर बाइक से कदौरा के हरिचंद्रपुर गांव अपनी ससुराल आए थे। एक दिन रुकने के बाद गुरुवार को वह वापस अपने गांव जाने के लिए निकले थे। कुछ दूर चलते ही ताहरपुरा गांव के पास अचानक एक आवारा गाय सड़क के बीचों बीच आ गई, जिसे देखकर हड़बड़ाहट में रमेश का बाइक से संतुलन बिगड़ गया और बाइक सीधी जाकर गाय से टकरा गई।

गाय का सींग रमेश के लगाए हेलमेट का शीशा तोड़ता हुआ अंदर घुस गया, जिसके बाद गाय ने झटके से अपना सींग निकाला, जिससे बाइक डिवाइडर से जाकर टकरा गई। हादसे में रमेश व संतोषी बुरी तरह लहूलुहान हो गई। उधर से निकल रहे राहगीरों ने जब हादसा होता देखा तो वह लोग दौड़कर आए और गाय को भगाकर उन दोनों को उठाया। हादसे में मासूम नेहा बाल-बाल बच गई।
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राहगीरों ने तुरंत निजी वाहन से उन लोगों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाकर परिजनों को सूचना दी। खबर सुनते ही परिजन अस्पताल पहुंचे, वहां से चिकित्सक ने उनकी हालत नाजुक देखते हुए जिला अस्पताल रेफर कर दिया। परिजन उन दोनों को जिला अस्पताल ला रहे थे कि रास्ते में रमेश ने दम तोड़ दिया। अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सक ने रमेश को मृत घोषित कर संतोषी की हालत नाजुक  होने पर उसे मेडिकल कालेज झांसी रेफर कर दिया।  

मां ने नहीं आने दी मासूम को खरोंच
कहते हैं कि मां की ममता के आगे भगवान भी हार मान जाता है। हादसे के दौरान संतोषी ने अपनी चिंता किए बिना नेहा को अपने आंचल में पूरी तरह सुरक्षित रखा, जबकि हादसे में किसी को पता नहीं चलता है कि वह कैसे गिरेगा, इस सब के बावजूद संतोषी ने नेहा को पूरी तरह सुरक्षित रखा और उसे एक खरोंच तक नहीं आने दी, जबकि वह खुद ही जिंदगी और मौत से जूझ रही है।
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