जिले में हत्या व ताबड़तोड लूट की वारदातों से पुलिस की नींद उड़ाने वाले गिरोह के चार शातिर बदमाशाें को पुलिस ने बड़ागांव के पास मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपियाें ने पिछले दिनों कुकरगांव पुल पर पहले निकलने के विवाद में युवक की हत्या करने की बात कबूल की है। पुलिस ने आरोपियाें से हत्या मे प्रयुक्त तमंचा,
कारतूस, एट से लूटा मोबाइल व चुर्खी से लूटे गए पैसे बरामद किए। आरोपियाें के खिलाफ तीन मुकदमे दर्जकर जेल भेज दिया गया। पुलिस अधीक्षक बबलू कुमार ने अपने कार्यालय में प्रेस वार्ता को बताया कि 11 अप्रैल को कोतवाली के गांव कुकरगांव के टूटे पुल पर वरुण कुमार निवासी किरवाहा रामपुरा थाना कुठौंद को गोली मार दी गई थी। युवक
ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया थे। इस मामले में परिजनों ने मृतक के ससुरालीजनों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस पर उन्होंने खुलासे के लिए शहर कोतवाल आलोक सक्सेना व एसटीटी टीम के प्रभारी मुहम्मद आरिफ खान के साथ सर्विलांस टीम को भी लगाया था। रविवार की रात दस बजे सूचना मिली कि दो बाइकों पर सवार तीन संदिग्ध
हाइवे स्थित बड़ागांव के पास जा रहे हैं। पुलिस ने घेराबंदी की तो बदमाशाें ने फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग कर शिवकुमार उर्फ भूरे निवासी तोपखाना जालौन, दिलीप राजपूत निवासी जोराखेरा थाना आटा, दीपक अहिरवार निवासी गांव कुसमिलिया थाना डकोर व सुरेश राजपूत निवासी गांव ददरी थाना आटा को गिरफ्तार कर
लिया। पुलिस को जब इनके नाम पता चले तो उसकी बांछें खिल गई क्योंकि चारों शातिर अपराधी हैं । इन पर हत्या, लूट व हत्या के प्रयास की कई संगीन वारदातें दर्ज हैं।
पुलिस को आरोपियाें ने बताया कि वह तब वारदात करते थे जब पुलिस की ड्यूटी व पिकेट न हो। इसके लिए वह शाम सात से दस बजे तक व सुबह चार बजे से छह बजे तक का
समय चुनते थे। एसपी ने बताया कि 11 अप्रैल को कुकरगांव के टूटे पुल पर पहले निकलने के झगड़े में वरुण ने दो बदमाशाें को जमीन पर गिरा दिया था। तभी साथी बदमाश
शिव कुमार ने गोली मार दी थी। एसपी ने चारों की हिस्ट्रीशीट खोलने की बात कही है। बताया कि पूरे गिरोह के हर सदस्य पर हत्या का मुकदमा दर्ज है। कहा कि डीआईजी के निर्देश पर पुलिस टीम को दस हजार रुपये का ईनाम दिया जाएगा।
रोज एक नई रोड पर वारदात
उरई। चारों आरोपियों ने जो वारदात का स्टाइल एसपी को बताया वह चौंकाने वाला था। इन्होंने बताया कि वह शाम सात बजे दो बाइकों पर सवार होकर निकलते थे और रास्ते में जो भी मिलता उसे लूटकर भाग जाते थे। कोई विरोध करता तो उसे पीटते थे। रोज एक रोड पकड़ते थे। कभी कालपी रोड तो कभी काेंच रोड तो कभी एट या माधौगढ़ रोड पर वारदात करते थे। बाइक सवाराें व ट्रक चालकाें को भी निशाना बनाते थे। कई वार तो महिलाआें की चेन लूटने पर वह नकली भी निकली। यह वारदातें पुलिस तक नहीं आ पाती थी या फिर पुलिस दबा देती है।
साथी की बताई बात सही
उरई। वरुण के साथ उस रात गांव का अनुज भी था। उसने पुलिस को पहले दिन ही बता दिया था कि टूटे पुल से निकलने के दौरान वरुण व बदमाशाें के बीच मारपीट के बाद एक बदमाश ने गोली मारी थी। यही बात बदमाशाें ने भी पुलिस को बताई तो यकीन हो गया कि वारदात इन्हीं बदमाशाें ने की है। जिस गांव के पास वारदात हुई उसके चौकीदार की भूमिका भी केस के खुलासे में अहम रही है। चौकीदार ने ही रोड बना रहे लोगों से बाइक का नंबर लिया और बदमाशाें का हुलिया बताया था।
ससुर बोले, थैंक्यू एसपी साहब
उरई। दामाद की हत्या के मामले में फंसे देवीदीन को जब खुलासे का पता चला तो वह बोले एसपी साहब ने उन्हें व उनके बच्चाें को जेल जाने से बचा लिया। रुण के परिजनाें ने देवीदीन व दो सालों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोपी बनाए गए देवीदीन निवासी इंद्रानगर ने एसपी को इस खुलासे के लिए धन्यवाद दिया।