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दस सालों से कर रहे थे टिकटों की कालाबाजारी

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उरई। टिकटों की कालाबाजारी करने में लगे सगे भाइयों की ऊंची पहुंच भी उन्हें नहीं बचा पाई। आरपीएफ सूत्रानुसार आरोपी भाईयों को छोड़ने के लिए कई प्रभावशाली लोगों ने सिफारिश भी की लेकिन उनके सारे दांव पेंच व्यर्थ साबित हुए। आरपीएफ प्रभारी राजीव उपाध्याय ने बताया कि दोनों भाई करीब बीते दस सालों से टिकटों की कालाबाजारी में लिप्त है। वर्ष 2016 में एक भाई शिवम पकड़ा भी जा चुका था और उसका भाई विनोद आरपीएफ के हत्थे नहीं चढ़ा था। तब शिवम ने इस धंधे को छोड़ने की बात कही थी लेकिन जमानत पर छूटने के बाद दोनों भाइयों ने घर से धंधा शुरु कर दिया था और अपना कमीशन भी बढ़ा दिया था। करीब तीन साल से ज्यादा समय तक इन लोगों ने फर्जीवाड़ा किया, इसकी शिकायत कई बार रेलवे के बड़े अफसरों तक भी पहुंच गई थी। इस पर उनके खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। बता दें कि आरपीएफ की क्राइम ब्रांच की ग्वालियर से आई टीम ने रविवार की देर शाम स्थानीय आरपीएफ की मदद से माहिल तालाब के पास स्थित नीलम लाज में छापा मारकर दोनों सगे भाइयों को पकड़कर लिया। आरपीएफ इंस्पेक्टर राजीव उपाध्याय ने बताया कि इंस्पेक्टर ने बताया कि मामले की विवेचना दरोगा ओमवीर सिंह को दी गई है। अब आरोपियों के जमानत पर छूटकर आने के बाद भी नजर रखी जाएगी ताकि यह आरोपी दोबारा टिकटों की कालाबाजारी का धंधा शुरू न करने पाए।
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