उरई। जिला अस्पताल का बर्न वार्ड झुलसे मरीजों का दर्द बढ़ा रहा है। सर्जन की तैनाती होने के बाद भी इस वार्ड का ताला नहीं खुल सका है। मजबूरी में झुलसे मरीजों को कानपुर व अन्य जिलो में रेफर किया जा रहा है।
जिला अस्पताल में झुलसे बदन वालों के इलाज के लिए 30 साल पहले पांच बेड का बर्न वार्ड बनाया गया था। इसमें ड्रेसिंग रूम और भर्ती वार्ड अलग-अलग था। यहां कर्मचारियों की भी तैनाती थी। सर्जन डॉ. श्रीकांत तिवारी के कार्यकाल तक बर्न वार्ड में मरीजों की भर्ती होती रहती थी। उन्होंने चार साल पहले स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली। इसके बाद से उस वार्ड में ताला लटक गया। वहां तैनात स्टाफ को इधर उधर शिफ्ट कर दिया गया। अब कुछ स्टाफ रिटायर भी हो गया है।
अक्तूबर माह में महोबा से स्थानांतरित होकर आए सर्जन डॉ. केपी सिंह ने कार्यभार संभाला था। इससे लोगों में बर्न वार्ड संचालित होने की उम्मीद जगी थी, इसके बावजूद बर्न वार्ड का ताला नहीं खुला है। जिसकी वजह से झुलसे मरीजों को झांसी और कानपुर रेफर करना पड़ रहा है।
जल्द शुरू कराया जाएगा बर्न वार्ड
अभी तक जिला अस्पताल में सर्जन की तैनाती नहीं थी। इसकी वजह से ताला लटक रहा था। हालांकि अब सर्जन आ गए है तो बर्न वार्ड का ताला खुलवाकर व्यवस्थाएं दुरुस्त कराई जाएंगी। कोशिश की जाएगी कि मरीजों को जिला अस्पताल में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
डॉ. अविनेश कुमार बनौधा, सीएमएस जिला अस्पताल