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अमृत भारत योजना : जगह-जगह बिखरी निर्माण सामग्री, गुणवत्ता की भी अनदेखी

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उरई। उरई रेलवे स्टेशन पर अमृत भारत योजना के तहत चल रहे कायाकल्प के काम में काम की रफ्तार बेहद धीमी है।
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साथ ही गुणवत्ता का भी ध्यान नहीं रखा जा रहा है। समय-समय पर आने वाले अधिकारी भी इस पर नाराजगी जाहिर कर चुके हैं, लेकिन ठेकेदार की कार्यशैली में सुधार नहीं है। गुरुवार को सेक्शन इंजीनियर विवेक दुबे ने निर्माण में प्रयोग होने वाली ईटों का निरीक्षण किया, गुणवत्ताविहीन मिलने पर उसका उपयोग निर्माण कार्य में न करने की हिदायत दी।
बता दें कि उरई रेलवे स्टेशन पर करीब 10 करोड़ की लागत से अमृत भारत योजना के तहत कायाकल्प का काम चल रहा है। काम की गति बेहद धीमी है। ठेकेदार की लापरवाही से जगह-जगह बिल्डिंग मैटेरियल फैला हुआ है, जिससे यात्रियों को दिक्कत हो रही है। आए दिन कोई न कोई यात्री गिरकर चुटहिल हो जाता है।
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सबसे ज्यादा दिक्कत उस वक्त होती है, जब कोई ट्रेन प्लेटफार्म पर आकर खड़ी हो जाती है और यात्रियों को जल्दबाजी में ट्रेन पकड़नी होती है। करीब तीन महीने से वेटिंग रूम का काम चल रहा है, लेकिन वेटिंग रूम का काफी काम अधूरा पड़ा है। इंट्री गेट पर भी महीनों से काम पूरा नहीं हो पाया है। सरकुलेटिंग एरिया में भी निर्माण सामग्री जगह-जगह फैली पड़ी है। साइकिल स्टैंड की जगह भी हट गई है। स्टेशन के बाहर अस्थायी वाहन स्टैंड बना दिया गया है। यह वाहन स्टैंड अब जाम का भी सबब बन गया है। इससे लोगों को दिक्कत हो रही है।
निर्माण कार्य के कारण आईओडब्ल्यू ऑफिस और कैंटीन में जलभराव की समस्या हो गई है। इस समस्या को लेकर आए दिन हो रही मौखिक शिकायतों पर बुधवार को सेक्शन इंजीनियर विवेक दुबे ने आरपीएफ दरोगा देशराज सिंह के साथ प्लेटफार्म पर चल रहे निर्माण कार्य का निरीक्षण किया और घटिया गुणवत्ता की ईटों को देखकर नाराजगी जताई और कहा कि इन ईटों का प्रयोग निर्माण कार्य में नहीं होना चाहिए। उन्होंने ठेकेदार से भी निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। कार्यदायी संस्था के संचालक एससी गुप्ता का कहना है कि काम में तेजी लाई जाएगी। मार्च 2024 तक काम पूरा कर दिया जाएगा।
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अमृत भारत योजना गति शक्ति के डायरेक्टर मताबर सिंह ने पिछले दिनों उरई रेलवे स्टेशन के कायाकल्प योजना के कार्यों का निरीक्षण किया था। उन्होंने निर्माण कार्य और ड्राइंग को लेकर नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने कहा कि जिस तरीके से यह काम हो रहा है, उससे आबादी के लिहाज से ठीक नहीं है। इसे अगले 30 साल की कार्ययोजना बनाकर करना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं किया गया है।

स्वराज सिंह ।

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स्वराज सिंह ।

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