उरई। वृद्ध की अपहरण करने के बाद हत्या के मुख्य आरोपियों को पुलिस एक सप्ताह बाद भी नहीं पकड़ पाई है। इससे परिजनों में पुलिस के प्रति नाराजगी है। वृद्ध की हत्या सुपारी देकर कराई गई है। शत्रुघन की गिरफ्तारी न होने से अभी यह नहीं पता चला है कि आखिर अपहरण और हत्या के लिए सुपारी दी किसने थी।
डकोर कोतवाली के कस्बा निवासी प्रेमबाबू राठौर(67) का 6 मार्च को औरैया पुलिस को शव मिला था। उके पुत्र ने पिता के साझीदार फूल सिंह और शत्रुघन पर मुकदमा दर्ज कराया था। उन्होंने पुलिस को बताया था कि उसके पिता उरई स्थित मकान पर आए थे, यहां से दोनों उन्हें स्कूटी से जालौन लेकर गए और कस्बा निवासी मोहित, जालौन के ही चुर्खीवाल निवासी आरिफ को सौंप दिया था। इसके बाद ये दोनों उसके पिता को नौमान के ऑटो से औरैया की ओर ले गए। इन लोगों ने शेरगढ़ के पास ले जाकर बेल्ट से गला घोंटकर हत्या करने की कोशिश की। इसके बाद इन लोगों ने उनकी चाकू से गला रेतकर हत्या कर दी थी।
पुलिस ने सीसीटीवी कैमरे के फुटेज और अन्य जांच के आधार पर मोहित को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में उसने घटना कबूल कर ली थी। उसी की निशानदेही पर पुलिस ने औरैया जिले में यमुना किनारे बीहड़ से शव बरामद कर लिया था। इसके बाद पुलिस इस मामले में अन्य आरोपियों की तलाश कर रही थी। इसमें मंगलवार को पुलिस ने मुठभेड़ में आरोपी आरिफ, ऑटो चालक नौमान को गिरफ्तार कर लिया था। मुठभेड़ स्थल से पुलिस टीम ने एक टैक्सी और अवैध असलहा भी बरामद किया था। पकड़े गए लोगों ने बताया था कि शत्रुघन ने उन्हें वृद्ध को मारने की दो लाख रुपये की सुपारी दी थी। अभी तक पुलिस मुख्य हत्यारोपियों तक नहीं पहुंच सकी है। थानाध्यक्ष योगेंद्र कुमार का कहना पूछताछ के साथ आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही है। दोनों आरोपी अपना मोबाइल घर पर ही छोड़ गए हैं।