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Jalaun News: 72 साल पहले बनते थे दो सांसद, अब एक ही

Mon, 20 May 2024 03:40 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
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जालौन। आजादी के बाद पहले लोकसभा चुनाव में जालौन क्षेत्र से एक ही दल के दो सांसद चुने गए। एक दल दो सांसद थोड़ा अटपटा तो जरूर था। लेकिन इसमें खास बात यह थी कि एक आरक्षित पद पर जबकि दूसरा अनारक्षित पद पर चुनाव मैदान में था।
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जालौन संसदीय क्षेत्र में इटावा को और झांसी के आंशिक हिस्से को शामिल कर यहां से दो सांसद निर्वाचित हुए इस चुनाव में 59 फीसदी से ज्यादा मतदान हुआ। उस समय मतदान का अधिक प्रचार प्रसार न होने से लोगों को मत प्रयोग की जानकारी कम थी। इसके चलते 30 हजार से अधिक मत अवैध निकले थे। वर्ष 1952 में पहले लोकसभा चुनाव में जालौन जनपद के दो सांसदों को प्रतिनिधित्व का मौका मिला। पहले लोकसभा चुनाव में जालौन लोकसभा क्षेत्र को जालौन इटावा संसदीय क्षेत्र के रूप में जाना गया क्योंकि इस क्षेत्र से इटावा भी जुड़ा हुआ था। इसके अलावा झांसी का क्षेत्र भी जुड़ा हुआ था।
जालौन इटावा संसदीय क्षेत्र को दो भागों में बांटा गया। जिसमें एक क्षेत्र को पश्चिम एवं दूसरे को उत्तर क्षेत्र बनाया गया। जिसमें पहले को आरक्षित किया गया जबकि दूसरा क्षेत्र अनारक्षित रखा गया। इस चुनाव में तब 10 लाख 33 हजार 384 मतदाता थे, जिन्हें अपने मत का प्रयोग करना था। पहली बार अपने मत का प्रयोग करने के लिए बूथ पर मात्र 6 लाख 15 हजार 154 मतदाता ही पहुंचे।
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चुनाव में 59.52 फीसदी मतदान हुआ और जब मतगणना हुई तो 30 हजार 842 मत अवैध पाए गए। इसमें वैध मत 5 लाख 84 हजार 312 थे। इंडियन नेशनल कांग्रेस पार्टी के सामान्य क्षेत्र के प्रत्याशी होरीलाल ने 1 लाख 21 हजार 586 मत लेकर विजय पताका फहराई थी। इसी प्रकार सुरक्षित क्षेत्र से चौधरी लोटनराम ने 1 लाख 51 हजार 820 मतों से जीत दर्ज कराई थी। इस चुनाव में किसान मजदूर पार्टी, शिड्यूल कास्ट फेडरेशन, सोशलिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया और उत्तर प्रदेश प्रज्ञा पार्टी के प्रत्याशियों को हार का सामना करना पड़ा था।
सामान्य क्षेत्र उत्तर प्रदेश प्रज्ञा पार्टी के उम्मीदवार गणेश प्रसाद को 74,400 मत मिले थे और वह दूसरे स्थान पर रहे थे। इसी प्रकार आरक्षित क्षेत्र से ज्वाला प्रसाद जोशी शिड्यूल कास्ट फेडरेशन के प्रत्याशी थे जो 88 ,659 मत पाकर दूसरे स्थान पर रहे थे। दो सांसद निर्वाचित होने का सिलसिला वर्ष 1962 के चुनाव में आकर थमा और सीट का नाम जालौन-गरौठा संसदीय क्षेत्र हो गया।
वर्ष 1962 में यह सीट आरक्षित कर दी गई थी इसमें कांग्रेस के चौधरी रामसेवक निर्वाचित हुए। वर्ष 1952 के बाद दूसरा चुनाव वर्ष 1957 में हुआ। इसमें भी क्षेत्र का बड़ा फेरबदल हुआ इटावा जिले को हटाकर हमीरपुर को जोड़ दिया गया और सब कुछ पहले चुनाव की तरह ही हुआ। इस चुनाव में मन्नूलाल द्विवेदी व चौधरी लोटनराम को जीत हासिल हुई। इसके बाद व्यवस्था बदलती गई 18वीं लोकसभा का चुनाव आते-आते सब कुछ बदल गया।
चुनाव में बस फर्क इतना है कि अब हाईटेक व्यवस्था है पहले इटावा जिला जुड़ा था और फिर हमीरपुर जुड़ गया। अब कानपुर देहात की भोगनीपुर विधानसभा संसदीय क्षेत्र में जुड़ी है तो झांसी जनपद का गरौठा समथर क्षेत्र भी जुड़ गया है। पहले जहां हाथ उठाकर प्रत्याशी चुने जाते थे। जो मोहर से होते हुए ईवीएम मशीन में बटन दबाने तक पहुंच गया है।
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