एसपी ने बताया कि आराधना का अपने चचेरे देवर विकास से अवैध संबंध था। पति बृजेश को इसकी भनक लग गई थी। इस कारण अक्सर पति-पत्नी में विवाद होता रहता था। इसी से आजिज होकर आराधना ने चचेरे देवर विकास के साथ मिलकर बृजेश की हत्या की योजना बनाई और 30 दिसंबर की रात उसे अंजाम दे दिया। विकास ने चाकू से अपने चचेरे भाई बृजेश के गले पर कई प्रहार किए।
पुलिस ने पूछताछ के बाद दोनों आरोपियों को संबंधित धाराओं में चालान कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। गिरफ्तार करने वाली टीम में कोतवाली प्रभारी बालमुकुंद मिश्र, आरक्षी अजय कुमार मौर्य, दीपक गिरी, महिला आरक्षी सुनीता यादव शामिल रहीं। पुलिस टीम को एसपी ने दस हजार रुपये नकद से पुरस्कृत किया।
बृजेश को तीन बच्चे हैं। इसमें दो बेटियां और सबसे छोटा बेटा है। हत्या के बाद पुलिस ने बेटियों से घटना के बारे में जानकारी ली थी। सीओ सिटी राहुल पांडेय को बेटियों ने बताया कि पापा नशे के आदि थे। उनका मम्मी से अक्सर विवाद होता था। वह मारपीट भी करते थे। इस जानकारी के बाद पुलिस ने पत्नी को ही शक के घेरे में रखकर छानबीन शुरू की।
मोबाइल सर्विलांस पर लगाकर कॉल डिटेल खंगाला गया, जिससे हत्या का राजफाश हुआ। पुलिस का शक इस कारण से भी गहरा हुआ कि चाकू से पति की गर्दन रेते जाने के बाद भी बगल के कमरे में सो रही पत्नी को इसकी भनक भी नहीं लगी।
एसपी ने बताया कि आराधना और उसके प्रेमी चचेरे देवर विकास ने बृजेश की हत्या की पूरी योजना मोबाइल फोन पर तैयार की थी। बृजेश के प्रति दोनों के मन में इस कदर नफरत भरी थी कि वह उसे किसी भी तरह जिंदा नहीं छोड़ना चाहते थे। लिहाजा मिलकर चाकू से बृजेश की गर्दन पर कई वार किए, जिससे उसकी जान बच न सके।