दीवार गिरी, पत्नी और पति की मौत
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रात को सो रहे पति-पत्नी को क्या पता थी कि वह दोनों अब कभी नहीं जग सकेंगे। तेर बारिश के चलते पति-पत्नी के ऊपर दीवार गिर गई। दोनों दीवार के मलबे में दब गए। जब तक मलबे स बाहर निकाले जाते, उससे पहले ही उनके प्राण पखेरू उड़ गए। दम्पत्ति की मौत से परिवार ही नहीं पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
सिकंदराराऊ कोतवाली क्षेत्र के गांव रामपुर जरारा में शुक्रवार तड़के हुई बारिश में एक मकान की कच्ची दीवार गिर गई और उसके मलबे में दबकर ओमप्रकाश (68) और उनकी पत्नी प्रेमवती (59) की मौत हो गई। बाद में दिन निकलने पर परिजनों के पहुंचने पर इसकी जानकारी हुई। सूचना पर एसडीएम वेद सिंह गांव में पहुंचे और हादसे के बारे में जानकारी की। पीएम आवास योजना से इनका मकान बन रहा था,जो अभी पूरा नहीं हुआ था। मरने वाले पति-पत्नी बृहस्पतिवार रात घर से कुछ दूरी पर स्थित घेर में बनाए गए कच्चे कमरे में सो रहे थे।
शुक्रवार भोर में करीब तीन से चार बजे के बीच जोरदार बारिश हुई, जिसमें इनके कच्चे मकान की दीवार गिर गई और उसके मलबे में ओमप्रकाश और उनकी पत्नी दब गए। तेज बारिश में किसी को इस हादसे का पता नहीं चला। सुबह करीब पांच बजे इनका पुत्र घेर में पहुंचा तो देखा कमरे का मलबा गिरा पड़ा था और उसके माता-पिता नजर नहीं आ रहे थे। उसने आसपास के लोगों को बुलाकर मलबा हटाया और दोनों को बाहर निकाला, लेकिन तब तक इनकी मौत हो चुकी थी।
माना जा रहा है कि मलबे में दम घुटने से उनकी मौत हुई है। इस हादसे से गांव में शोर की लहर है। सूचना पर जिला पंचायत सदस्य सोनू चौहान और पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। एसडीएम वेदसिंह चौहान ने भी घटनास्थल पर जाकर हादसे की जानकारी ली। उन्होंने बताया कि हादसा दुखद है और पीड़ित परिवार को सरकार से मिलने वाली हर संभव सहायता कराई जाएगी।
समय से किस्त मिल जाती तो पूरा हो जाता मकान, नहीं जाती दंपती की जान
ओमप्रकाश को पीएम आवास आवंटित हुआ था। पहली किस्त मिलने के बाद उसने मकान का निर्माण शुरू करा दिया था। उसने घेर में कच्ची दीवार बनाकर उस पर टीनऔर पन्नी डालकर एक अस्थायी कमरा बनाया हुआ था। रात में वह और उसकी पत्नी इसी में सोने के लिए आते थे, परिवार के अन्य लोग दूसरी जगह सोने के लिए चले जाते थे। परिजनों का कहना है कि मकान की दूसरी किस्त खाते में पहुंच गई थी, लेकिन सत्यापन नहीं होने के कारण वह निकल नहीं पाई थी। उनका कहना है कि समय से किस्त मिल जाती तो बरसात से पहले ही मकान पूरा हो जाता।