सहकारी समिति प्रभारियों के साथ बैठक करते इफ्को के अधिकारी व अन्य। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
विकास भवन सभागार में जनपद की 70 सहकारी समितियों के प्रभारियों को नैनो यूरिया एवं अन्य उत्पादों के प्रयोग की तकनीकी जानकारी एवं उनकी उपयोगिता के बारे में जागरूक किया। संचालन करते हुए आईपी मलिक मुख्य क्षेत्र प्रबंधक इफको ने बताया कि फसल पर पहला छिड़काव यूरिया का तथा दूसरा छिड़काव नैनो यूरिया का करना चाहिए। 500 मिलीलीटर नैनो यूरिया की एक बोतल को 125 लीटर पानी में मिलाकर एक एकड़ फसल पर छिड़काव करना चाहिए।
नैनो यूरिया का अवशोषण रूप पत्तियों में प्रवेश स्टोमेटा के माध्यम से होता है। इस प्रकार नैनो कण पौधे की कोशिकाओं में प्रवेश करते हैं और कोशिका के रिक्त स्थानों में जमा हो जाते हैं। यहां से फसल की आवश्यकता अनुसार धीरे-धीरे नाइट्रोजन की आपूर्ति होती रहती है। नैनो यूरिया का 80 फीसदी अवशोषण पौधा कर लेता है, जिससे फसल की पैदावार बढ़ती है।
जबकि दानेदार यूरिया का अवशोषण 20 से 30 फीसदी ही हो पाता है। नैनो यूरिया से कीट और बीमारियां के प्रति सहनशीलता भी बढ़ती है। वायु जल एवं भूमि प्रदूषण मुक्त रहती है मिट्टी के लाभदायक जीवाणु तथा मित्र जीव भी सुरक्षित रहते हैं। सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक संतोष सिंह यादव ने अन्य उत्पादों पर समितियों को मिलने वाले मार्जिन के बारे में जानकारी दी।