सहपऊ के बाबली रजबहा 100 वर्ष से अधिक पुराना बरगद का वृक्ष। संवाद
- फोटो : samvad
कस्बा सहपऊ के बाबली रजबहा और हसायन के गांव अंडौली में बरगद का वृक्ष चार पीढि़यों से लोगों को छांव दे रहा है। ग्रामीणाें ने बरगद के इस पेड़ को अभी तक सहेजकर रखा है। इसकी टहनियां अब जमीन को छूने लग गई हैं। गांव वाले इस बरगद के वृक्ष की त्योहारों पर पूजा भी करते हैं और गर्मी में इस बरगद की छांव में आराम करते है। दोनों बरगद के पेड़ों की उम्र 100 वर्ष से अधिक मानी जा रही है। वन विभाग की ओर से बरगद के इन दोनों वृक्षों का चयन धरोहर के रूप में करके इसका प्रस्ताव शासन को भेजा है। अब विभाग को शासन के निर्देशों का इंतजार है।
शासन की ओर से 100 वर्ष या उससे पुराने पेड़ों को हेरिटेज (धरोहर) का दर्जा दिए जाने के लिए यहां जिले में सर्वे कराया गया है। जिले में वन विभाग की ओर से कस्बा सहपऊ के बाबली रजबहा व हसायन के गांव अंडौली में बरगद के पेड़ को धरोहर वृक्ष के रूप में चयनित किया गया है। यह दोनों वृक्ष करीब 100 वर्षों से अधिक समय से यहां के ग्रामीणों के लिए वरदान बने हुए हैं। अब वृक्षों की वजह से ही इन क्षेत्रों की पहचान बन जाएगी। वन विभाग की ओर से इन वृक्षों का चयन धरोहर के रूप में किए जाने से ग्रामीणाें में उत्साह है।
शादी होकर जब से इस गांव में आई हूं, तब से ही इस वट वृक्ष को ऐसे ही देखा है। सुहागिन महिलाएं इसकी पूजा करतीं हैं।
-दीना गौतम, बाबली
यह ग्राम का काफी पुराना वृक्ष है। हमारे दादा-दादी भी हमें इसकी कहानियां सुनाते थे। यह हमेशा हरा-भरा रहता है।
-पंकज कुमार, बाबली
मेरी उम्र लगभग 50 वर्ष है और इस वृक्ष की उम्र 120 वर्ष बताई जाती है। इसके नीचे लगे नल का पानी काफी ठंडा रहता है।
महेश गौतम, बाबली
बरगद के इन वृक्षों को धरोहर के रूप में चयनित किया गया है। शासन को इसकी रिपोर्ट भेजी गई है। इन दोनों वृक्षों की उम्र 100 साल से अधिक बताई गई है।
-डीवी सिंह, एडीएसओ