सूखा पड़ा मेंडू का प्राचीन तालाब
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नवाबों की रियासत रही नगर पंचायत मेंडू में नवाबों के समय से ही वर्षा का जल संचयन करने की व्यवस्था की गई थी। दूसरी ओर से अब नगर पंचायत मेंडू में करीब तीन बीघा भूमि में बना तालाब एक-एक बूंद पानी के लिए तरस रहा है। पिछले नगर निकाय बोर्ड के कार्यकाल के दौरान इस तालाब में जाने वाले पानी के सभी स्रोतों को बंद कर दिया गया है। इस कारण इस तालाब के नजदीक के खेतों में जलभराव की स्थिति बन गई है। कभी इस तालाब में पानी होने पर पक्षी कलरव करते थे तो पशु अपनी प्यास बुझाते थे।
शासन की ओर से वर्षा जल के संचयन के लिए गांव व शहरों में तालाबों का सुंदरीकरण कर उन्हें तैयार किया जा रहा है। इसके पीछे मकसद गिरते भूजल स्तर को सुधारने के साथ पशु-पक्षियों के पीने के लिए पानी की व्यवस्था करना भी है।
हैरानी की बात यह है कि नगर पंचायत मेंडू में बना तालाब पूरे कस्बे के जल को संग्रहीत करता था, लेकिन अब उसका अस्तित्व खत्म होता जा रहा है। कई सालों से इस तालाब में पानी की एक भी बूंद नहीं पहुंच सकी है। पिछले नगर निकाय कार्यकाल के दौरान इन तालाब तक जाने वाले सभी पानी के स्रोतों को नगर पंचायत प्रशासन की ओर से बंद करा दिया गया है। इस कारण यह तालाब सूखा पड़ा है।
अब नहीं रहे छायादार वृक्ष
क्षेत्रीय लोगों के अनुसार लगभग तीन बीघा के इस तालाब के पास किसी समय 20-25 फुट ऊंचे मिट्टी के टीले पर घनी छाया वाले वृक्ष होते थे। वहीं एक शिवालय भी बना था, जो कि नगर पंचायत प्रशासन की अनदेखी के कारण अस्तित्व में नहीं है।
खेतों में जलभराव से पनप रहे मच्छर
पिछले कई सालों से इस तालाब में जल के सभी स्रोतों को अवरुद्ध कर दिया गया है। इस कारण मेंडू की आबादी का पानी आसपास के खेतों में भरता है। खेतों में इस पानी के कारण फसल तो खराब हो ही रही है, आसपास के लोगों में मच्छरों के कारण बीमारी का खतरा बना हुआ है।
पूर्व में कई बार समस्या को लेकर पंचायत प्रशासन को अवगत कराया गया है। मुख्य मार्ग के किनारे होने के कारण पंचायत प्रशासन इस तालाब को रमणीक स्थल बना सकता है। -अजय गोस्वामी
तालाब तक पानी जाने के सभी मार्ग अवरुद्ध होने के कारण आबादी का पानी खेतों में भरा रहता है। इस कारण फसल भी नहीं बोई जाती है। नगर पंचायत को इस पर अतिशीघ्र कार्य शुरू करना चाहिए। -अंकित कुशवाहा
पहले यह तालाब पानी से पूरा भरा रहता था। ग्रामीण अपने पशुओं को नहलाया करते थे। अब तालाब तो साफ हो गया, लेकिन यह सूखा पड़ा है। इसे पुनर्जीवित कराया जाए तो भूजल स्तर बढ़ सकता है।-अभिषेक दिवाकर