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बदलती जा रही है शिक्षक व विद्यार्थियों के बीच संबंधों की परिभाषा

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संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
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समय के साथ-साथ शिक्षक व विद्यार्थियों के बीच के संबंधों में बदलाव हुआ है। ना तो पहले जैसे शिक्षक रहे हैं और ना ही पहले जैसे विद्यार्थी हैं। खुद वरिष्ठ अध्यापकों का यह कहना है कि शिक्षक और शिष्य के बीच ऐसे संबंध होने चाहिए, जैसे प्राचीन काल में थे।
- समय परिवर्तनशील है। ऐसे में काफी बदलाव की जरूरत है। न तो पहले जैसे गुरु रहे हैं और ना ही पहले जैसे विद्यार्थी। गुरु ऐसा होना चाहिए, जो शिष्य की कामनाओं को पूरा कर सके। शिष्य को भी गुरु के लिए समर्पित होना चाहिए। इसके लिए दोनों ओर से प्रयास करने होंगे। - स्वतंत्र कुमार गुप्त, राज्य अध्यापक पुरस्कार प्राप्त शिक्षक।
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- आज के परिवेश में शिक्षक एवं छात्र का संबंध वहीं होना चाहिए तो प्राचीन समय में तक्षशिला एवं नालंदा विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं छात्रों में था। शिक्षकों को अपने छात्रों को सर्वप्रथम भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति का पाठ पढ़ाना चाहिए। भारतीय दर्शन का ज्ञान होना अतिआवश्यक है। - डॉ. सुभाषचंद्र शर्मा, राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक।
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- शिक्षक वह होता है जोकि बच्चों में नया जीवन, नई आत्मा खोजता है। शिक्षक तो मशालची है नई जिंदगी का। शिक्षक वो नहीं है जो एक चार दीवारी में कुछ पुस्तकों में लिपटे शब्दों को बच्चों में उड़ेलता है। शिक्षक का दर्जा तो भगवान से भी ऊपर दिया गया है। - हेमंत कटारा, राज्य अध्यापक पुरस्कार प्राप्त शिक्षक
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