मेला श्रीदाऊजी महाराज के आयोजन पर इस बार वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की नजर रहेगी। मेले में इस बार बड़ी दुकानें लगाने वालों और खेल-तमाशे वालों को खरीद-बिक्री का पूरा ब्योरा रखना होगा। उन्हें जीएसटी के अस्थायी पंजीयन भी लेने होंगे।
मेला श्रीदाऊजी महाराज का ठेका करोड़ों में उठने का पूरा फायदा जीएसटी विभाग लेना चाहता है। अब ठेकेदार को तो जीएसटी का भुगतान करना ही पड़ेगा, खेल-तमाशे वालों और दुकानदारों को भी अपनी अनुमानित कमाई का ब्योरा देते हुए जीएसटी का अस्थायी पंजीयन लेना होगा। इस पंजीयन के जरिए माल बिक्री व सेवा देने वाली संस्थाओं को जीएसटी का भुगतान करना होगा। अभी तक मेले में होने वाली जीएसटी की चोरी को काफी हद तक रोका जा सकेगा।
पूर्व में मनोरंजन कर विभाग वसूलता था राजस्व
जीएसटी लगने के बाद मेला आयोजन से सरकार को राजस्व की वसूली पूरी तरह बंद हो गई है, जबकि जीएसटी लगने से पहले मनोरंजन कर मेला के तमाम खेल तमाशे वालों से राजस्व वसूल कर सरकार को देता था, लेकिन जीएसटी लगने के बाद से राजस्व की ओर से सभी का ध्यान हट गया। जिला प्रशासन के साथ जीएसटी महकमा भी आयोजित मेले से राजस्व वसूलने की ओर ध्यान नहीं दे रहा, जबकि मनोरंजन कर विभाग व उसके अधिकारियों को स्टेट जीएसटी में समायोजित किया गया है।
मेला आदि के आयोजनों में व्यापारिक रूप से प्रतिभाग करने वालों को जीएसटी के अंतर्गत कैजुअल डीलर की कैटेगरी में डाला गया है। उन्हें चाहिए कि वह एक निर्धारित समय के लिए जीएसटी का अस्थायी पंजीयन लेकर कारोबार करें। इसमें उन्हें अपने टर्नओवर के आधार पर अनुमानित जीएसटी अग्रिम भी जमा करनी होगी।
-गिरीश शर्मा, वरिष्ठ कर अधिवक्ता।