मेला श्रीदाऊजी महाराज का बेशक समापन हो गया है, लेकिन मेले में आए दुकानदार अभी भी कमाई की आस में डेरा जमाए हुए हैं। इस साल का मेला मंदा रहने के कारण दुकानदार नुकसान होने की बात कह रहे हैं। दुकानदारों का आकलन है कि इस साल मेले में पिछले साल की अपेक्षा 60 फीसदी ही भीड़ आई है।
इधर, समापन के बाद सोमवार की रात से ही मेला परिसर में झूला उतारने का काम शुरू हो गया है। पंडाल से भी दुकानदार अपना सामान समेट रहे है, लेकिन मुख्य मेला बाजार के दुकानदारों को अभी भी कमाई की आस है। उनका कहना है कि इस साल मेला काफी मंदा रहा है। चाट-पकौड़ी बेचने वाले भी इस साल मेले में बड़ा नुकसान होने की बात कह रहे हैं।
उन्हें जिला प्रशासन की ओर से मेले का समय नहीं बढ़ाए जाने का भी मलाल है, लेकिन दुकानदार अभी कुछ दिन और ठहरकर कुछ मुनाफा कमाना चाहते हैं। यही कारण है कि मंदिर के आसपास का बाजार मंगलवार शाम तक आबाद था। खिलौनों, रोजमर्रा के सामान के अलावा खाने-पीने के सामान की दुकानें भी बाजार में जमी हुई हैं।
झूलों के ठेकेदार पर बेइमानी का आरोप
इस साल के मेला में लगभग सभी झूला संचालक पहली बार यहां आए थे। उनका कहना है कि झूलों का ठेका एक सब ठेकेदार को कमीशन पर दिया गया था। उस ठेकेदार ने आखरी तीन दिन का कमीशन झूला वालों को नहीं दिया, जबकि आखरी तीन दिन मेला अच्छा चला था।
अब मेरी पांचवीं पीढ़ी यहां दुकान लगा रही है। इस साल का मेला काफी खराब गया है। इस साल पिछले साल की अपेक्षा 60 फीसदी ही भीड़ आई है। देहातों से किसान इस साल मेला में नहीं आ पाए हैं। इसका कारण मेला लगने में एक माह की देरी होना भी रही है।
-राकेश कुमार, माखन मिश्री विक्रेता
इस साल जैसा मेला नहीं हुआ पहले कभी। हर साल कुछ न कुछ कमाकर ले जाते थे, लेकिन इस साल जेब से 25 हजार रुपये देकर यहां से जा रहे हैं। ये मान लो कि इस साल सिर्फ अपने नाम का ठेका लगाए जाने की परंपरा को कायम रखा है।
-रवि कुमार, चुस्की विक्रेता
पिछले साल बारिश ने काफी परेशान किया था। इस साल मंदी से परेशान रहे। अब हाथरस का दाऊजी मेला पहले जैसा मुनाफे वाला नहीं रहा। सबसे बड़ी दिक्कत लगातार बढ़ रही जमीन व बिजली की कीमतें हैं। इस साल जो कमाई हुई, वह ठेकेदार की रकम चुकाने में चली गई।
-अहमद, अलीगढ़ के खिलौना विक्रेता
दाऊजी के मेले में पहली बार ही आए थे। यहां एक तो स्टाफ के नाम पर फ्री में झूलने वालों की कमी नहीं है। वहीं इस साल जो ठेकेदार हमें लाया था, वह हमारा तीन दिन का कमीशन लेकर चला गया है। इस मेले में नुकसान हुआ है।
-जफर, झूला संचालक आगरा