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Hathras News: रामवीर उपाध्याय के परिवार से हटाई एससी-एसटी एक्ट की धारा, किया आरोप मुक्त

Sat, 02 Dec 2023 11:40 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने हाथरस के प्रमुख राजनैतिक परिवार के सदस्यों और उनके समर्थक को एससी-एसटी अधिनियम की धारा (3)(2)(पांच) के आरोप से मुक्त कर दिया। इस मामले में पूर्व कैबिनेट मंत्री रामवीर उपाध्याय के भाइयों विनोद उपाध्याय, ब्लॉक प्रमुख रामेश्वर उपाध्याय, बेटे चिराग उपाध्याय, चिंटू गौतम और शशिकांत आरोपी थे।
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रामवीर उपाध्याय - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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पूर्व कैबिनेट मंत्री रामवीर उपाध्याय के परिवार को सुप्रीम कोर्ट ने राहत दी है। कोर्ट ने रामवीर उपाध्याय के भाइयों विनोद उपाध्याय, ब्लॉक प्रमुख रामेश्वर उपाध्याय, बेटे चिराग उपाध्याय, चिंटू गौतम और शशिकांत से एससी-एसटी एक्ट की धारा हटा दी है।

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत अपराध के लिए यह जरूरी है कि आरोपी को पीड़ित व्यक्ति के एससी/एसटी समुदाय का होने की जानकारी पहले से हो। इस टिप्पणी के साथ जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने हाथरस के प्रमुख राजनैतिक परिवार के सदस्यों और उनके समर्थक को एससी-एसटी अधिनियम की धारा (3)(2)(पांच) के आरोप से मुक्त कर दिया। इस मामले में पूर्व कैबिनेट मंत्री रामवीर उपाध्याय के भाइयों विनोद उपाध्याय, ब्लॉक प्रमुख रामेश्वर उपाध्याय, बेटे चिराग उपाध्याय, चिंटू गौतम और शशिकांत आरोपी थे।

पीठ ने हाथरस से संबंधित शशिकांत शर्मा तथा अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य के मामले में अपने आदेश में लिखा- हालांकि यह देखते हुए कि आरोपियों के खिलाफ हत्या के प्रयास सहित अन्य धाराओं के तहत दर्ज मुकदमों को चुनौती नहीं दी गई है, कहा कि आईपीसी के तहत दर्ज मुकदमे चलते रहेंगे। दरअसल आरोपी के वकील ने सिर्फ एससी-एसटी एक्ट की धारा को ही इस अपील के जरिए चुनौती दी थी। 
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पीठ ने अब इस मामले को विशेष अदालत से सत्र न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया है। शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली आरोपी की अपील पर यह फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने आरोपी के आरोपमुक्ति के आवेदन को खारिज करने को बरकरार रखा था। पीठ ने तथ्यों पर गौर करते हुए कहा कि यह स्पष्ट है कि इस घटना में राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के भाव थे। 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि तथ्य से यह पता चला है कि जब गवाह रिंकू ठाकुर, जिसने आरोप लगाया था कि उस पर आरोपी विनोद उपाध्याय ने गोली चलाई थी। इसकी चिकित्सकीय जांच की गई, तो उसके शरीर पर बंदूक की गोली की चोट के कोई निशान नहीं मिले।

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