जिले में डीएपी के लिए किसान दर-दर भटक रहे हैं। चंदपा क्षेत्र की पूर्वी सहकारी समिति पर रविवार को डीएपी वितरण के दौरान जमकर हंगामा हुआ। खाद लेने के लिए किसानों में आपस में ही हाथापाई हो गई। किसानों ने समिति के कर्मचारियों पर खाद के बोरों की कालाबाजारी करने और खाद के बोरों को समिति गोदाम से अलग एक टिनशेड में कालाबाजारी के इरादे से छिपाकर रखने का आरोप लगाया है। जिले की कई सहकारी समितियों पर डीएपी न होने की वजह से ताले लटके रहे।
जिले में खाद्यान्न वितरण को लेकर वर्तमान में हंगामे की स्थिति बनी हुई है। चंदपा की पश्चिमी सहकारी समिति पर सन्नाटा पसरा रहा। चंदपा पूर्वी सहकारी समिति पर खाद्यान्न वितरण को लेकर हंगामे की स्थिति बनी रही। डीएपी लेने के लिए आपस में ही समिति पर नोकझोंक व हाथापाई हो गई। एक बोरा डीएपी खाद के लिए दिव्यांग किसान शिवकुमार के साथ एक अन्य व्यक्ति की हाथापाई हो गई। कुछ किसानों ने बीच-बचाव कर हाथापाई को रोका।
मैं दिव्यांग हूं। इसके बावजूद दो दिन से लगातार डीएपी के लिए समिति के चक्कर काट रहा हूं। पर्ची भी नहीं दी गई। 10 बीघा जमीन है। उन्हें मात्रा एक बोरा डीएपी की आवश्यकता है, लेकिन उसके लिए सुबह से बैठाकर रखा हुआ है।
-शिवकुमार, गढ़ी परती बनारसी।
समिति कर्मियों द्वारा परेशान किया जा रहा है। डीएपी खाद नहीं दिया जा रहा है। एक बोरा डीएपी की पर्ची है, वह भी उनको नहीं दिया जा रहा है। उसके लिए भी वह सुबह से परेशान घूम रहीं हूं।
-रामवती, खेड़ा परसौली।
खाद चाहिए तो 1600 रुपये प्रति बोरा मिलेगी
सवा सौ बीघा जमीन वाले बूलगढ़ी निवासी किसान नरेंद्र प्रताप सिसोदिया ने आरोप लगाया कि उनको शनिवार की शाम को उनके मोबाइल नंबर पर सचिव चंदपा पूर्वी सहकारी समिति के नंबर से कॉल करके धमकाया जा रहा है। उनसे कहा गया है कि समिति की तरफ झांकने की आवश्यकता नहीं है। आपको दो बोरे ही मिलेंगे। अगर आपको इससे ज्यादा चाहिए तो 1600 रुपये की दर से जितने चाहो, उतने बोरे मिल जाएंगे। किसान ने बताया कि समिति कर्मियों ने कई अन्य जगह भी इसी दर से डीएपी के बोरे दिए हैं। किसान ने समिति सचिव और एआर की सांठगांठ का भी आरोप लगाया है।
आत्मनिर्भर समितियों पर लगा ताला, मायूस लौट रहे किसान
सहपऊ। क्षेत्र में आलू की बुवाई युद्ध जोरों पर चल रही है, लेकिन किसान डीएपी लेने के लिए सहकारी समितियों के चक्कर लगा रहे हैं। रविवार को क्षेत्र में अधिकतर आत्म निर्भर समितियों पर ताला लगा रहा। किसान इन समितियों से मायूस होकर लौट गए। विभाग द्वारा कभी एक अथवा दो समितियों पर खाद भेजकर इतिश्री कर ली जाती है। जिन समितियों पर खाद आ जाता है, उन पर किसानों की कतारें लग जाती हैं और खाद नहीं मिलने पर किसान हंगामा शुरू हो जाता है। जिन समितियों पर खाद आ जाता है, उनके सचिवों का कहना है कि उन्हें पहले उन किसानों को खाद देना है, जो समिति के सदस्य हैं। अन्य समितियों के किसान यहां शोर-शराबा करने लगते हैं। अब तो सचिवों ने अपने मोबाइल नंबर भी बंद कर दिए हैं। संवाद
14 अक्तूबर के बाद खोंडा आत्मनिर्भर समिति पर डीएपी की खाद नहीं आई है। काफी परेशान हैं। इसके साथ ही बाजार में भी खाद उपलब्ध नहीं है। सचिव ने मोबाइल बंद कर दिया है। आखिर हम लोग कहां जाएं।
-मुकेश गौतम, खोंडा।
ज्यादा डीएपी डालने पर भी महज 30 फीसदी का ही होता है उपयोग
हाथरस। शासन से जिले को वित्तीय वर्ष 2023-24 में रबी सीजन के लिए 23072 एमटी डीएपी बांटने का लक्ष्य मिला था। माह अक्तूबर तक जिले का लक्ष्य 10200 एमटी था। इसके सापेक्ष जिले में 10298 एमटी डीएपी की आपूर्ति हुई है और 7540 एमटी का वितरण हो चुका है। जिला कृषि अधिकारी आरके सिंह ने बताया कि इफ्को की 1368 एमटी डीएपी की रैक हाथरस किला स्टेशन पर लग चुकी है। यहां से डीएपी को विभिन्न समितियों को भेजा जा रहा है।
उन्होंने बताया है कि मोजैक, एनएफएल तथा आईपीएल की रैक अलीगढ़ और एटा में 30 अक्तूबर को लगना प्रस्तावित है। इस रैक से जिले को 1500 एमटी डीएपी की आपूर्ति होगी, जो निजी खाद विक्रेताओं को भेजी जाएगी। उन्होंने बताया कि आलू की फसल में चार बैग, गेहूं की फसल में तीन बैग और सरसों की फसल में 2 बैग प्रति हेक्टेयर की आवश्यकता होती है। ज्यादा डीएपी डालने पर जमीन में 30 प्रतिशत ही उपयोग में आती है। शेष डीएपी भूमि में अघुलनशील रूप में पड़ा रह जाता है। इधर, अधिकारियों ने विभिन्न स्थानों पर निरीक्षण कर डीएपी वितरण की स्थिति को जांचा। उप निदेशक कृषि हंसराज ने जिला कृषि अधिकारी, सहायक निबंधक सहकारिता तथा क्षेत्रीय प्रबंधक पीसीएफ ने संयुक्त रूप से उप्र राज्य भंडारण निगम के गोदाम का निरीक्षण कर गोदाम में भंडारित डीएपी को समितियों को भिजवाया। इस क्रम में जिला कृषि अधिकारी व सहायक निबंधक सहकारिता ने क्षेत्रीय सहकारी समिति का निरीक्षण किया।
कुछ निजी दुकानों पर ही डीएपी उपलब्ध हो सकती है। निजी क्षेत्र में भी डीएपी 1350 रुपये की दर से बिक्री करने के निर्देश हैं। कुछ दुकानदार किराया आदि को जोड़कर 10-20 रुपये ऊपर से ले लेते हैं। इस मामले को दिखवाया जाएगा। समिति पर सचिव के आरोपों की भी जांच की जाएगी।
-आरके सिंह, जिला कृषि अधिकारी