वर्ष 1936 में पं. गया प्रसाद श्रावण के अधिमास में गोवर्धन परिक्रमा के लिए गए और फिर वहीं गिरिराज महाराज की सेवा में लीन हो गए। वैराग्य तो पहले ही धारण कर चुके थे। यहां उन्होंने महात्मा वेश धारण कर पूर्ण विरक्ति को अंगीकार कर लिया। वहां राधाकुंड के पास मिर्ची महाराज की बगीची में रहने लगे। ब्रज वासियों से भिक्षा कर वे भक्ति योग के अनुष्ठान में जुट गए। नित्य गिरिराज की परिक्रमा का भी उन्होंने नियम बनाया और यह शरीर में सामर्थ्य रहने तक निभाया।
नगर पालिका ने बनवाया पं. गया प्रसाद चौक
नगर पालिका परिषद द्वारा पं. गया प्रसाद जी महाराज के नाम से घंटाघर स्थित चौक का सुंदरीकरण कराया गया है। यहां एक बड़े स्थान पर संत गया प्रसाद की प्रतिमा लगवाई गई है और इस स्थान को काफी सुंदर तरीके से बनाया गया है, जिस पर संगरमर का पत्थर लगाया गया। इसकी सुंदरता देखते ही बनती है। सुबह-शाम यहां बाबा की पूजा-अर्चना व आरती के लिए भक्त पहुंचते हैं। शाम को हरिनाम संकीर्तन का आयोजन होता है।