हाथरस जनपद में सहपऊ को नगर पंचायत का दर्जा मिले 164 वर्ष बीत चुके हैं। अंग्रेजी हुकूमत ने सात जनवरी 1859 को नगर पंचायत का दर्जा दिया था। उस समय सहपऊ कस्बा बूरे और नील की खेती के साथ कपड़े का बड़ा व्यापारिक केंद्र था। पास बने जलेसर रोड रेलवे स्टेशन पर दूसरे शहरों से माल आता था।
जानकार बताते हैं कि यहां म्यांमार की राजधानी रंगून से कपड़ा एवं बंग्लादेश की राजधानी ढाका से रेशम का कपड़ा थोक में आता था। नगर पंचायत का पहला चुनाव वर्ष 1919 में हुआ था। लोगों ने हाथ उठाकर सेठ चंदन बाबू को नगर पंचायत का अध्यक्ष चुना था। नगर पंचायत में अब तक कुल 17 चेयरमैन हुए हैं। इसके अलावा एक कार्यवाहक चेयरमैन भी रहे हैं। दो महिलाएं क्रमश: चंद्रवती दिवाकर और पद्मावती वार्ष्णेय भी नगर पंचायत की अध्यक्ष रह चुकी हैं। सबसे लंबा कार्यकाल पंडित रोशनलाल का रहा। वह इस पद पर सात वर्ष तक रहे और सबसे कम लगभग एक माह का कार्यकाल सेठ भानु प्रकाश गुप्ता का रहा।
इसके बाद होतीलाल को वरिष्ठ सदस्य होने पर तत्कालीन जिलाधिकारी ने कार्यवाहक चेयरमैन बनाया था। नगर पंचायत के इतिहास में किसी भी राजनीतिक दल का प्रत्याशी अभी तक नहीं जीत पाया है। सभी निर्दलीय प्रत्याशी ही जीते हैं। नगर पंचायत में 10 वार्ड हैं। सीमा विस्तार के बाद नगर पंचायत में चार गांव बढ़े हैं, जिनमें नगला सुखराम, नगला बादाम, तकिया एवं नगला मेवा हैं। सन 2017 में यहां 7300 वोटर थे, जिनकी संख्या अब लगभग 8776 से ज्यादा हो चुकी है।
सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे लोग
कस्बे में वर्ष 1972 से लेकर अब तक दो वित्तपोषित इंटर कॉलेज ही बन पाए हैं। युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए बाहर जाना पड़ता है। अंग्रेजों के जमाने में नील की खेती होती थी। वह भी अब नहीं रही। स्वास्थ्य सेवाएं भी नाम मात्र की हैं। यातायात के संसाधन न के बराबर हैं। उद्योग-धंधे भी नहीं हैं। कस्बा आर्थिक रूप से पिछड़ा हुआ है।
अध्यक्षों को कार्यकाल
मार्च 1919 से 1924 तक सेठ चंदन बाबू
अप्रैल 1924 से 1929 तक पन्नालाल वर्मा
मई 1929 से 1934 तक डालचंद वर्मा
उक्त तीनों चेयरमैन हाथ उठाकर चुने गए थे।
(पहला चुनाव जुलाई 1934 में हुआ)
जुलाई 1934 से 1939 तक सेठ सतीशचंद्र शाह
अगस्त 1939 से 1944 तक ठा. महावीर शाह
मार्च 1952 से लाला भानु प्रकाश एक महीने तक रहे
इसके बाद होतीलाल कार्यवाहक चेयरमैन बने
वर्ष 1952 से 1957 तक सुनहरीलाल आजाद (निर्विरोध)
जून 1957 से 1964 तक पंडित रोशनलाल शर्मा ( सात वर्ष तक)
जुलाई 1964 से 1979 तक ठा. निहाल शाह
अगस्त 1974 से 1979 तक कालीचरण शर्मा
सितंबर 1979 से 1984 तक रामकिशन गुप्ता
( तीन वर्ष शासन व्यवस्था)
अक्तूबर 1989 से 1994 तक ठा. जुगेंद्रपाल सिंह
अक्तूबर 1994 से 1999 तक नवीन प्रकाश शुक्ला
नवंबर 2000 से 2005 तक चंद्रवती देवी
( दो साल तक शासन व्यवस्था )
अक्तूबर 2007 से 2012 पद्मावती देवी
अक्तूबर 2012 से 2017 तक भगवती प्रसाद
दिसंबर 2017 से 03 जनवरी 2023 तक विपिन वशिष्ठ चेयरमैन