इस मंदिर को चमत्कारी महादेव के नाम से भी पहचाना जाता है। किवदंती तो यह भी है कि कोई व्यक्ति चुनौती देकर शिवलिंग को अपनी बाहों में नहीं भर सकता। सेवा-पूजा के दौरान ऐसा अचानक संभव हो जाता है।
पांडवों ने भी की थी पूजा
वनखंडी महादेव मंदिर से पांडवों का भी जुड़ाव रहा है। बुजुर्गों का है कि अज्ञातवास के दौरान यहां पाडवों ने कुछ वक्त गुजारा। इस दौरान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना की थी। मंदिर से एक किमी दूर नारद की तप स्थली मदौर भी है। यह क्षेत्र मथुरा जिले में पड़ता है। मंदिर के प्राचीन स्वरूप का जिक्र ब्रजमंजरी नामक पुस्तक में दिया गया है।
बचपन से ही हम इस मंदिर के बारे में अपने पिताजी से सुनते आए हैं। मंदिर पर औरंगजेब ने भी हमला किया था। शिवलिंग पर आज भी कुदाल से प्रहार के निशान बने हुए हैं। अगर पर्यटन विभाग से इस मंदिर का सुंदरीकरण होता है तो सुविधाओं में इजाफा होगा। -लक्ष्मणदास पुजारी
भोले बाबा के मंदिर के सुंदरीकरण और विकास होने से यहां दूर दराज से आने वाले भक्तों को सुविधा मिलेगी। पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही क्षेत्र का विकास भी होगा। इससे आगरा, मथुरा और हाथरस तीनों जिलों को भोले बाबा मंदिर से सीधे जोड़ने में सुलभता होगी।- श्यामवीर सिंह छौंकर