फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Good News: सादाबाद का वनखंडी मंदिर पर्यटन स्थल के रूप में होगा विकसित, यहां का शिवलिंग है साढ़े पांच फुट का

Wed, 28 Jun 2023 03:02 AM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस

सार

करीब छह हजार वर्ष पुराने इस मंदिर पर मुगल शासक औरंगजेब ने हमला किया था। उसने शिवलिंग को उखाड़ने का प्रयास किया मगर सफलता नहीं मिली। इसकी खोदाई भी कराई गई, लेकिन मजदूर इसके अंतिम छोर तक नहीं पहुंच सके। कुदाल के निशान शिवलिंग पर आज भी मौजूद हैं।
विज्ञापन
सादाबाद का वनखंडी मंदिर - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हाथरस में सादाबाद क्षेत्र के गांव मिढ़ावली स्थित में स्थित वनखंडी महोदव मंदिर का पर्यटन स्थल के रूप में विकास होगा। पर्यटन विभाग की ओर से राज्य योजना के तहत इसके लिए मंजूरी दे दी गई है। मंदिर के सुंदरीकरण पर करीब एक करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस मंदिर का इतिहास छह हजार वर्ष पुराना है। जमीन से शिवलिंग की ऊंचाई करीब साढ़े पांच फुट है मगर इसकी गहराई का पता कोई नहीं लगा पाया है। इसकी चौड़ाई साढ़े चार फुट है। 

विज्ञापन


बुजुर्ग बताते हैं कि करीब छह हजार वर्ष पुराने इस मंदिर पर मुगल शासक औरंगजेब ने हमला किया था। उसने शिवलिंग को उखाड़ने का प्रयास किया मगर सफलता नहीं मिली। इसकी खोदाई भी कराई गई, लेकिन मजदूर इसके अंतिम छोर तक नहीं पहुंच सके। कुदाल के निशान शिवलिंग पर आज भी मौजूद हैं। यह शिवलिंग गांव मिढ़ावली के जंगल में यमुना किनारे एक टीले पर है। इसके प्रति आसपास के जिलों के भक्तों की भी अटूट आस्था है। 

यही वजह है कि पर्यटन विभाग ने इस शिव मंदिर को सुंदरीकरण के लिए चुना है। सुंदरीकरण कार्य के तहत मंदिर परिसर में बैठने की व्यवस्था की जाएगी और शौचालय की सुविधा के साथ अन्य व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया जाएगा। जिला पर्यटन सूचना अधिकारी विशाल श्रीवास्तव ने बताया कि एक करोड़ रुपया सुंदरीकरण के कार्यों के लिए मंजूर हुआ है। जल्द ही योजना बनाकर काम शुरू कराया जाएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

इस मंदिर को चमत्कारी महादेव के नाम से भी पहचाना जाता है। किवदंती तो यह भी है कि कोई व्यक्ति चुनौती देकर शिवलिंग को अपनी बाहों में नहीं भर सकता। सेवा-पूजा के दौरान ऐसा अचानक संभव हो जाता है। 



पांडवों ने भी की थी पूजा
वनखंडी महादेव मंदिर से पांडवों का भी जुड़ाव रहा है। बुजुर्गों का है कि अज्ञातवास के दौरान यहां पाडवों ने कुछ वक्त गुजारा। इस दौरान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना की थी। मंदिर से एक किमी दूर नारद की तप स्थली मदौर भी है। यह क्षेत्र मथुरा जिले में पड़ता है। मंदिर के प्राचीन स्वरूप का जिक्र ब्रजमंजरी नामक पुस्तक में दिया गया है। 

बचपन से ही हम इस मंदिर के बारे में अपने पिताजी से सुनते आए हैं। मंदिर पर औरंगजेब ने भी हमला किया था। शिवलिंग पर आज भी कुदाल से प्रहार के निशान बने हुए हैं। अगर पर्यटन विभाग से इस मंदिर का सुंदरीकरण होता है तो सुविधाओं में इजाफा होगा। -लक्ष्मणदास पुजारी
भोले बाबा के मंदिर के सुंदरीकरण और विकास होने से यहां दूर दराज से आने वाले भक्तों को सुविधा मिलेगी। पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही क्षेत्र का विकास भी होगा। इससे आगरा, मथुरा और हाथरस तीनों जिलों को भोले बाबा मंदिर से सीधे जोड़ने में सुलभता होगी।- श्यामवीर सिंह छौंकर

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें