राज्य वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के अंतर्गत समाधान योजना में पंजीकृत जिले के बड़ी संख्या में व्यापारियों द्वारा निल के रिटर्न दाखिल किए जा रहे हैं। यही वजह है कि विभाग में पंजीकृत व्यापारियों का आंकड़ा बढ़ने के बावजूद राजस्व में गिरावट आ रही है। अब विभाग ऐसे व्यापारियों के बारे में छानबीन में जुट गया है और जल्द ही इनको नोटिस जारी करने की तैयारी की जा रही है।
स्टेट जीएसटी के अंतर्गत छोटे कारोबारियों द्वारा समाधान योजना का लाभ लिया जाता है। इसके अंतर्गत कारोबारी को बिक्री पर मात्र एक फीसदी कर देना होता है। इस तरह का पंजीयन लेने वालों में मुख्य रूप से दवा कारोबारी, परचून किराना स्टोर, जनरल मर्चेंट, कपड़ा आदि ऐसे व्यापारी हैं, जो कारोबार करते हैं।
बड़ी संख्या में पंजीयन के बाद भी इनके द्वारा निल के रिटर्न दाखिल किए जा रहे हैं, ताकि कर देयता से बचा जा सके, जबकि ऐसा मुमकिन नहीं कि ट्रेडिंग कारोबार में कुछ भी खरीद-बिक्री न हो। इसका असर सीधे तौर पर विभागीय राजस्व पर पड़ रहा है। समाधान योजना में मिलने वाला राजस्व अधिक होने की बजाय घट गया है, जबकि पिछले एक साल के पंजीयन में एक सौ से अधिक की बढ़ोतरी हुई है।
पिछले वर्ष से इस साल 15 लाख कम मिला राजस्व
जनपद में जीएसटी का समाधान लेने वालों की संख्या पिछले साल की पहली तिमाही में 972 थी, जिसमें निल टैक्स रिटर्न फाइल करने वाले 268 व रिटर्न दाखिल न करने वालों की संख्या 147 थी। बावजूद इसके स्टेट जीएसटी के तीनों खंडों से लगभग 50 लाख का राजस्व मिला था, जबकि इस साल की पहली तिमाही में पंजीकृत व्यापारियों की संख्या बढ़कर 1080 हो गई। रिटर्न दाखिल न करने वालों की संख्या शून्य व निल रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या 143 है। बावजूद इसके स्टेट जीएसटी को मात्र 35 लाख रुपये का राजस्व मिला है।
समाधान योजना छोटे व्यापारियों के हित के लिए लागू की गई है। इसमें बिक्री का मात्र एक फीसदी कर देना होता है। समाधान अपनाने वाले कुछ व्यापारियों द्वारा खरीद की जा रही है, लेकिन निल बिक्री के रिटर्न दाखिल किए जा रहे है। ऐसे व्यापारियों से अनुरोध है कि वे अपनी बिक्री पर समय से समाधान राशि और रिटर्न दाखिल करें, ताकि भविष्य में होने वाली किसी भी विधिक कार्रवाई से बच सकें।
-आरके सिंह, उपायुक्त प्रशासन, स्टेट जीएसटी हाथरस