अनंतिम आरक्षण जारी होने के बाद नगर निकाय चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की गतिविधियां जारी है। टिकट पाने के लिए दावेदार आला नेताओं के चक्कर लगा रहे हैं। सबसे ज्यादा दावेदार भाजपा में सामने आ रहे हैं। अन्य दलों में चुनाव लड़ने के इच्छुक राजनेता अपने आवेदन दे रहे हैं।
सबकी नजर चुनाव कार्यक्रम पर लगी है। साथ ही जिन नेताओं के हिसाब से आरक्षण नहीं हुआ है, वह आपत्ति दर्ज कराने में जुटे हैं। हालांकि उन्हें इससे ज्यादा उम्मीद नहीं दिखाई दे रही। दो दिन पहले नगर निकाय चुनाव को लेकर अनंतिम आरक्षण जारी कर दिया गया। इससे निकाय चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधि फिर तेज हो गई हैं। वर्ष 2017 की अपेक्षा इस बार आरक्षण में काफी फेरबदल हुआ है और कुछ राजनेताओं को इस आरक्षण से अपना नुकसान भी होता दिख रहा है। वहीं आरक्षण घोषित होने के बाद निकाय चुनाव में अध्यक्ष से लेकर सभासद सीट तक के लिए सबसे ज्यादा दावेदार भाजपा में है।
भाजपा का टिकट पाने के लिए दावेदार प्रदेश स्तरीय आला नेताओं के चक्कर लगा रहे हैं। इन दावेदारोें का मानना है कि एक बार भाजपा के टिकट मिल जाए, जीत को वह अपने आप जाएंगे ही। बसपा, सपा और कांग्रेस के नेता भी निकाय चुनाव जोर-शोर से लड़ने की बात कह रहे हैं। सबकी नजर फिलहाल चुनाव कार्यक्रम पर लगी है कि चुनाव आयोग चुनाव कार्यक्रम कब घोषित करेगा।