पैरा कमांडो हरवीर सिंह (फाइल फोटो)
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लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास सोमवार को युद्धाभ्यास के दौरान पैराशूट न खुलने से क्षेत्र के गांव बरामई के रहने वाले पैरा कमांडो हरवीर सिंह की जान चली गई। घटना के बाद से हरवीर का परिवार सदमे में है। मंगलवार देर शाम उनका शव गांव लाया जाएगा। 2019 में हुई सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान वीरता दिखाने के लिए हरवीर को सेना मेडल से सम्मानित किया गया था।
बरामई के रहने वाले सुग्रीव सिंह के दूसरे नंबर के पुत्र हरवीर सिंह का चयन 2002 में भारतीय सेना में हुआ था। 2013 में उनका चयन पैरा कमांडो के रूप में हुआ था। हरवीर सिंह की तैनाती इस समय आगरा में थी। कई दिनों से लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास भारतीय सेना द्वारा युद्ध अभ्यास किया जा रहा है।
हरवीर सिंह को भी इसमें शामिल होने के लिए लद्दाख बुलाया गया था। सोमवार को हरवीर सिंह ने भारतीय सेना के हेलीकॉप्टर से छलांग लगाई। दुर्भाग्यवश उनका पैराशूट नहीं खुला जिससे हरवीर सिंह की जान चली गई। हादसे की जानकारी परिजनों को हुई तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।
परिवार में सभी लोग सदमे में हैं। पिता सुग्रीव सिंह ने बताया है कि हरवीर सिंह देश के लिए ही जन्मा था। 2019 में हुई सर्जिकल स्ट्राइक में वह शामिल रहा था। वीरता के लिए उसे स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सेना मेडल से सम्मानित किया गया था।
हरवीर के अलावा सुग्रीव सिंह के तीन अन्य बेटे हैं। बड़ा बेटा ओमवीर भी भारतीय सेना में लद्दाख में तैनात है। तीसरा बेटा प्रेमवीर सिंह उत्तर प्रदेश पुलिस में सेवा दे रहा है। छोटा बेटा हेमंत गांव में कृषि कार्य देखता है।