फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Oldest child syndrome: बच्चे के व्यवहार में दिखे बदलाव, तो यह करें

Thu, 05 Jan 2023 10:56 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस

सार

परिवार में दूसरे बच्चे के आ जाने के बाद बड़े बच्चे के व्यवहार में बदलाव देखा जा सकता है। इस दौरान बच्चा आक्रामक भी हो सकता है। माता-पिता को बच्चे पर ध्यान देना चाहिए। वह मानसिक स्वास्थ्य काउंसलर से सलाह ले सकते हैं।
विज्ञापन
बच्चा - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

ओल्डेस्ट चाइल्ड सिंड्रोम की परेशानी बच्चों में माता-पिता के व्यवहार के कारण अक्सर आ जाती है। ये वो बच्चे होते हैं, जिनके छोटे भाई-बहन घर में आ जाने पर उन्हें पहले की तुलना में अटेंशन कम मिलता है। साइकेट्रिस्ट बताते हैं कि दूसरे बच्चे के जन्म के बाद भी पहले बच्चे को पहले जितना ही अटेंशन देना चाहिए और दोनों की बच्चों के साथ सामान्य व्यवहार करना चाहिए।

विज्ञापन


शहर निवासी 05 वर्षीय चिंटू (बदला हुआ नाम) के घर में उसकी छोटी बहन के जन्म के बाद उसके व्यवहार में बदलाव देखा गया। वह छोटी-छोटी बातों को लेकर बहुत जिद करने लगा था। माता-पिता के कुछ भी कहने पर वह चिड़चिड़ा रहा था। इसके अलावा वह अपनी छोटी बहन को मारने भी लगता था, जिसके बाद उसके अभिभावक उसे जिला अस्पताल के मन कक्ष में लेकर पहुंचे। वहां उसकी काउंसलिंग की गई। साथ ही माता-पिता को भी दोनों ही बच्चों के साथ एक जैसा व्यवहार करने की सलाह दी गई। इसके अलावा बच्चे की बात को पूरा सुनने और ठीक प्रकार से उसका उत्तर देने के लिए बताया गया, जिसके बाद अब वह पहले से काफी ठीक है।

जिला अस्पताल में तैनात साइकेट्रिस्ट सोशल वर्कर नीलिमा मधु हांसदा ने बताया कि घर में छोटे भाई-बहन के आ जाने पर बड़े बच्चे की जिंदगी में बदलाव आते हैं। जहां माता-पिता का सारा ध्यान पहले बड़े बच्चे पर ही रहता था, लेकिन छोटे बच्चे के आ जाने पर उस पर टिक जाता है। इससे बड़ा बच्चा स्ट्रेस में आ सकता है और कई बच्चों के विकास पर भी इसका असर पड़ता है। उन्होंने बताया कि महीने भर में इस तरह के 4 से 5 मामले आते हैं। 
विज्ञापन


इस तरह के मामलों में बच्चों के साथ-साथ उनके अभिभावकों को भी बताया जाता है कि उन्हें बच्चों के साथ किस तरह पेश आना चाहिए। उन्होंने बताया कि माता-पिता को बताते हैं कि दोनों बच्चों के साथ समान व्यवहार करें। बच्चे की गतिविधियों की अनदेखी न करें। उन्होंने बताया कि सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को जिला अस्पताल में बने मनकक्ष में सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक काउंसिलिंग की जाती है।

परिवार में दूसरे बच्चे के आ जाने के बाद बड़े बच्चे के व्यवहार में बदलाव देखा जा सकता है। इस दौरान बच्चा आक्रामक भी हो सकता है। माता-पिता को बच्चे पर ध्यान देना चाहिए। उसकी गतिविधि पर नजर रखनी चाहिए। माता-पिता बच्चों को प्यार से समझाएं। किसी बच्चे में इस तरह के लक्षण दिखें तो माता-पिता उसे जिला अस्पताल या सीएचसी पर लेकर जा सकते हैं। जहां वह मानसिक स्वास्थ्य काउंसलर से सलाह ले सकते हैं।  -डॉ. एमआई आलम, मानसिक स्वास्थ्य के नोडल अधिकारी/ डिप्टी सीएमओ

ये हैं ओल्डेस्ट चाइल्ड सिंड्रोम के लक्षण

  • छोटे भाई-बहनों पर हावी होना
  • हाई सेल्फ रेस्पेक्ट
  • हमेशा परफेक्ट बनने की चाहत
  • माता-पिता की अपेक्षाओं का दबाव
  • माता पिता का दूसरे बच्चे को प्रोत्साहित करना
  • अनहेल्दी कॉम्पिटेटिव एटीट्यूड
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें