यदि किसी दूसरे राज्य या जिले में वाहन लेकर गए हैं और फिटनेस की अवधि समाप्त होने वाली है तो वाहन स्वामी उसी जिले व राज्य में अपने वाहन की फिटनेस करा सकेंगे। यह व्यवस्था व्यवसायिक वाहनों के लिए की गई है।
उल्लेखनीय है कि व्यवसायिक वाहनों की प्रत्येक तीन और दो साल में फिटनेस जांच करानी पड़ती है। वाहन स्वामी एक बार वह अपने पंजीकृत जिले में तो दूसरी बार कहीं अन्य जगह फिटनेस टेस्ट करा सकेंगे। इस दौरान शर्त यह रहेगी कि एक बार यदि किसी दूसरे जिले या राज्य में फिटनेस टेस्ट कराया तो अगली बार अपने मूल पंजीकृत जिले में ही यह परीक्षण करना होगा। कैबिनेट की बैठक में मोटर नियमावली 1998 के नियम 39 में संशोधन प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है।
इस व्यवस्था से जिले से करीब चार हजार वाहन स्वामियों को लाभ होगा। फिटनेस के दौरान यह भी देखा जाएगा कि वाहन हांफने के साथ धुंआ तो नहीं उगल रहा है, क्योंकि हाथरस जिला टीटीजेड क्षेत्र में आता है, इसलिए परिवहन विभाग का यहां प्रदूषण की रोकथाम पर खासा ध्यान है। एआरटीओ प्रशासन नीतू सिंह का कहना है कि वाहनों की फिटनेस से संबंधित आदेश नहीं आया है। जैसे ही आदेश आएगा, उस पर अमल किया जाएगा।