जिले मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेलों के नाम पर लकीर पीटी जा रही है। इन मेलों में विशेषज्ञ चिकित्सक न पहुंचने से मरीज भी उपचार के लिए नहीं पहुंच रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी निरीक्षण के नाम पर खानापूर्ति कर देते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को चिकित्सा सुविधा सुलभ कराने के लिए मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेला की शुरुआत की गई थी। मरीजों को एक ही स्थान पर चिकित्सकीय परामर्श, जांच व दवाओं की निशुल्क सुविधा मुहैया कराना इस मेले का उद्देश्य है। सरकार की यह योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है।
इन मेलों में न तो विशेषज्ञ चिकित्सक पहुंच रहे हैं और न ही जांच की पर्याप्त व्यवस्था है। इससे अब इन मेलों में मरीजों ने भी आना बंद कर दिया है। जिले में स्वास्थ्य मेले के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। वहीं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी मेले के निरीक्षण के नाम पर खानापूर्ति कर देते हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की उदासीनता के कारण मुख्यमंत्री की महत्वाकंक्षी योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है।
केस 1
सीएमओ कार्यालय स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मधुगढ़ी पर रविवार को मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले का आयोजन किया गया। मेले में कोई विशेषज्ञ चिकित्सक मौजूद नहीं था। दोपहर को 12 बजकर 15 मिनट पर मेले में कोई मरीज मौजूद नहीं था। चिकित्साधिकारी डॉ. श्वेता मरीजों का इंतजार कर रही थीं। उन्होंने बताया कि उस समय तक मात्र तीन ही मरीज उपचार के लिए आए थे।
केस2
सादाबाद के कुरसंडा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर लगाए गए स्वास्थ्य मेले में भी कोई विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं पहुंचा। केंद्र पर डॉ जगदीश चंद्र व फार्मासिस्ट चंद्रशेखर व एसटी कैलाश मौजूद थे। यहां भी मरीजों की संख्या यहां भी कम रही। कुछ मरीज आए भी जिनका चिकित्सक ने उपचार किया।
वर्जन
जिले में विशेषज्ञ चिकित्सकों की काफी कमी है, इसलिए स्वास्थ्य मेलों में विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं पहुंच पा रहे हैं। जहां तक मरीजों की संख्या का सवाल है, उसे बढ़ाने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा।
-डॉ.मंजीत सिंह, सीएमओ हाथरस।