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फर्म को ब्लैक लिस्ट मामले में पालिका प्रशासन बैकफुट पर

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संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
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नगर पालिका परिषद द्वारा तालाब चौराहा स्थित तालाब के सौंदर्यीकरण कार्य को अधर में छोड़कर जाने वाली फर्म को काली सूची में डालने के मामले में पेच फंस गया है। नगर पालिका प्रशासन की ओर पालिका अध्यक्ष के अनुमोदन पर कार्यदायी संस्था ट्रेडिंग इंजीनियर्स को 7 अक्तूबर को अनुबंध निरस्त करने के साथ साथ 32 लाख रुपये की सिक्योरिटी जब्त कर फर्म को काली सूची में डाला गया। हैरानी की बात यह रही कि 10 अक्तूबर को ही यह आदेश को निरस्त कर दिया गया। इसके बाद अब नगर पालिका प्रशासन ने उक्त फर्म को ब्लैक लिस्ट करने के लिए डीएम को संस्तुति की है।
उल्लेखनीय यह है कि नगर पालिका परिषद द्वारा तालाब के सौंदर्यीकरण के लिए ट्रेडिंग इंजीनियर्स नामक फर्म से अनुबंध किया था। इसके बाद इस फर्म के द्वारा कार्य अधर में छोड़ने को लेकर नगर पालिकाध्यक्ष के अनुमोदन पर उक्त फर्म को ईओ नगर पालिका परिषद ने ब्लैक लिस्ट कर दिया।
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चर्चा उस समय तेज हुई जब उक्त फर्म को ब्लैक लिस्ट की सूची से चंद दिनों बाद ही बाहर निकालते हुए उक्त फर्म को ब्लैक लिस्ट करने की संस्तुति डीएम से की गई। वहीं दूसरी ओर करीब एक महीने पहले झांसी की ही एक और फर्म अर्वा एसोसिएट्स के खिलाफ दो कार्य को कराने में असफल रहने के कारण काली सूची में डालने की कार्रवाई की गई थी।
यह कार्रवाई भी नगर पालिका के चेयरमैन आशीष शर्मा के अनुमोदन से अधिशासी अधिकारी ने की थी। उक्त मामले को लेकर जैसे ही ट्वीट का दौर शुरू हुआ आनन फानन ट्रेडिंग इंजीनियर फर्म को काली सूची में डालने के मामले में पालिका ने अपने कदम पीछे खींच लिए और उक्त फर्म को ब्लैक लिस्ट करने के लिए जिलाधिकारी को संस्तुति की।
दरअसल, 15 वें वित्त की राशि से अर्वा एसोसिएट्स के तीन कार्य चल रहे थे। दो में फर्म का अनुबंध निरस्त करके उन कार्यों की सिक्योरिटी जब्त की गई है जबकि एक कार्य में फर्म को काली सूची में डालने के बाद भी न तो अनुबंध निरस्त हुआ है न ही उसकी सिक्योरिटी जब्त की गई है। इस मामले में पालिका की कार्रवाई से चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
हालांकि दूसरी ओर नगर पालिका परिषद हाथरस के चेयरमैन आशीष शर्मा के खिलाफ शासन स्तर से नगरपालिका अधिनियम 1916 की धारा 48 की कार्रवाई के सिलसिले में जो कारण बताओ नोटिस मिल रहे हैं, उनमें तालाब सौंदर्यीकरण का कार्य भी शामिल है। वहीं यह कार्य विजिलेंस जांच में भी शामिल हैं।
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नगर पालिका ईओ राजकुमार सिंह यादव ने बताया कि इस फर्म को ब्लैक लिस्ट करने का अधिकार जिला स्तरीय कमेटी को है। इस कारण संबंधित कर्मचारियों की अनदेखी के कारण ब्लैक लिस्ट का आदेश जारी हो गया था। इस आदेश को निरस्त कर डीएम को ब्लैक लिस्ट करने की संस्तुति की गई है। पूर्व में भी जिस संस्था को ब्लैक लिस्ट किया गया है, उस संस्था को भी जिलाधिकारी को ब्लैक लिस्ट करने के लिए संस्तुति की जाएगी।
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