संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
सपा संरक्षक और पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव का हाथरस से गहरा नाता रहा है। वे कई बार हाथरस आए। इस बार के लोकसभा और विधानसभा चुनाव को छोड़ दें तो पिछली बार के चुनावों तक वह जिले में चुनावी सभाओं मेें निरंतर आते रहे। शहर में उन्होंने डीआरबी इंटर कॉलेज, बागला कॉलेज, लेबर कॉलोनी पार्क, इगलास रोड पर जनसभाएं की थी। जिले के कई राजनेताओं से उनके बेहद करीबी रिश्ते रहे। उनके निधन पर सपाइयों में शोक की लहर दौड़ गई है।
मुलायम सिंह यादव सबसे पहले 1980 में चौधरी चरण सिंह के साथ डीआरबी इंटर कॉलेज में जनसभा करने के लिए आए थे। उस समय पूर्व मंत्री चौ. राजेंद्र सिंह, पूर्व विधायक कु. रामरसन सिंह जैसे राजनेता भी सभा में थे। मुलायम सिंह एक दिन पहले ही यहां आ गए थे।
सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष रामबहादुर उर्फ भोला पहलवान बताते हैं कि तब सभी राजनेताओं ने उनके दाल मील पर ही भोजन किया था। इसके बाद नेताजी क्रांति रथ लेकर हाथरस आए। तब मेरे पिता और नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष श्यामसुंदर यादव उर्फ श्याम पहलवान ने उनका स्वागत किया था। मेरे पिताजी ने हाथरस की सोनपापड़ी और बालूशाही के डिब्बे भी उनके साथ रख दिए थे।
भोला यादव का कहना है कि नेताजी ने उन्हें पांच साल पार्टी का जिलाध्यक्ष बनाया। पहली बार जिलाध्यक्ष बनने पर जब वर्ष 1997 में मैं लखनऊ में नेताजी के आवास पर गया तो उन्होंने पहचान लिया और कहा कि तू श्याम पहलवान का लड़का है। हाथरस से आया है। हाथरस की सोनपापड़ी की भी तारीफ की।
उसके बाद मैं कई बार नेताजी के लिए सोनपापड़ी लेकर गया। उन्होंने बताया कि नेताजी अक्सर चुनाव के दौरान सभाएं करने लिए यहां आते थे। उनके यहां भी कई बार आए। भोला यादव ने बताया कि नेताजी उन्हें एमएलसी बनाना चाहते थे लेकिन बाद में उनकी सहमति से ही डॉ. राकेश सिंह राना को एमएलसी बनाया। उन्होंने नेताजी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
एक ही दिन में सादाबाद में की थी पांच जनसभाएं
वर्ष 2001 में सादाबाद सीट पर हुए उपचुनाव को जीतने के लिए सपा ने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया था। इस चुनाव में सपा ने डॉ. अनिल चौधरी को टिकट दिया था। तब मुलायम सिंह यादव ने एक ही दिन में सादाबाद क्षेत्र के अलग-अलग गांवों में पांच जनसभाएं की थी। पूर्व विधायक डॉ. अनिल चौधरी ने बताया कि उनका मुलायम सिंह यादव से परिचय वर्ष 1996 में हुआ।
इस चुनाव में उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में काफी बेहतर प्रदर्शन किया था और इसी वजह से वर्ष 2001 के चुनाव में नेताजी ने उन्हें सपा से टिकट दिया था। हालांकि यह चुनाव वह नहीं जीत सके थे लेकिन इसके बाद वर्ष 2002 में भी उन्हें ही टिकट दिया था। इस चुनाव को वह केवल 76 वोट से हार गए थे। उन्होंने कहा कि नेताजी जमीन से जुड़े नेता थे और आम लोगों का दुख दर्द समझते थे।
नेताजी ने अपने दम पर किया मुकाम हासिल : सुमन
राजनीति में मुलायम सिंह यादव के बेहद खास रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री रामजीलाल सुमन का मुलायम सिंह से परिचय 1968 में हो गया था। सपा के राष्ट्रीय महासचिव रामजीलाल सुमन कहते हैं कि तब नेताजी विधायक हो गए थे। इस दौरान मैं सोशलिस्ट पार्टी में सक्रिय था।
आपातकाल आंदोलन में हम साथ-साथ रहे। सपा का नेताजी ने 1992 में गठन किया तब भी मैं उनके साथ रहा। वर्ष 1999 से लेकर वर्ष 2004 तक हम दोनो एक साथ संसद सदस्य रहे। उन्होंने कहा है कि नेताजी ने राजनीति में जो भी मुकाम हासिल किया, वह अपने संघर्ष पर किया। वह हर गरीब की की पीड़ा को समझते थे। आम आदमी के दुख दर्द को महसूस करते थे।
भाजपा के पूर्व विधायक व पूर्व ओलंपियाड राजवीर सिंह पहलवान मुलायम सिंह के बुलावे पर दो बार उनके गांव सैफई में कुश्ती दंगल में भाग ले चुके हैं। राजवीर ने बताया कि मुलायम सिंह यादव खुद पहलवान थे और कुश्ती दंगल के शौकीन भी थे। वर्ष 1991 व वर्ष 1992 में दो बार उनके बुलावे पर मैं सैफई गया और वहां कुश्ती दंगल में भाग लिया। नेताजी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।