वट वृक्ष की पूजा करते हुए सुहागिनें
- फोटो : अमर उजाला
वट अमावस्या का पर्व शुक्रवार को धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। सुहागिन महिलाओं ने पूरे दिन उपवास रखा। सज-संवरकर वट वृक्ष की पूजा की। पर्व की प्रचलित कहानियां सुनीं और पकवानों से भोग लगाकर पति की दीर्घायु की कामना की। वट वृक्षों के आसपास तो महिलाओं का तांता लगा ही रहा, जिन महिलाओं को वट वृक्ष नहीं मिल पाए, उन्होंने मंदिरों में वट की टहनियों का पूजन कर लिया।
वट सावित्री उपवास सुहागिनों के विशेष महत्व रखता है। ज्यादातर महिलाएं यह व्रत रखती हैं और यमराज से पति की रक्षा की प्रार्थना करती हैं। शुक्रवार को सुबह से ही महिलाएं घरों से पूजा-अर्चना के लिए निकल पड़ीं। जगह जगह महिलाओं ने वट वृक्ष की पूजा-अर्चना की और परिक्रमा कर पति की दीर्घायु की कामना की।
मान्यता है कि इस दिन वट वृक्ष के नीचे सत्यभान-सावित्री की कथा सुनने से सुहागिन महिलाओं की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। वट वृक्ष पर ब्रह्मा, विष्णु व महेश तीनों का वास होता है। जो महिलाएं वट की पूजा नहीं कर पाती हैं, वह घर पर ही वट वृक्ष की टहनी का पूजन कर लेती हैं। इस उपलक्ष्ययें शहर में जगह-जगह पानी और शर्बत की प्याऊ लगाई गई।
शनि मंदिरों में भी लगा तांता
हाथरस। शुक्रवार को वर अमावस्या के साथ शनि जयंती भी थी। लिहाजा शहर के शनि मंदिरों में सुबह से शाम तक शनिदेव की पूजा और उनका तैलाभिषेक करने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। श्रद्धालुओं ने काले तिल, काले उड़द, लोहा, गुड़ और काले वस्त्रों से शनिदेव का पूजन किया और शांति व समृद्धि की कामना की। कई शनि मंदिरों में फूलबंगला सजाया गया तो कहीं पूड़ी-सब्जी का भोग लगाकर प्रसाद वितरित किया गया।