वीरेन्द्र जैसवाल, अध्यक्ष नगर कांग्रेस कमेटी।
- फोटो : Samvad
नगर पंचायत सहपऊ 164 वर्ष पुरानी है। पुराने समय में इस नगर के लिए आने-जाने का कोई विशेष साधन नहीं था। बैल गाड़ियां, तांगे एवं घोड़ा आदि से लोग आते जाते थे। समय बदलता रहा। नगर से लगभग एक किमी दूरी पर करीब सत्तर वर्ष पूर्व मथुरा-एटा मार्ग का निर्माण हुआ था। तब से लेकर आज तक नगर में रोडवेज बसों का संचालन कभी दो माह से अधिक समय के लिए नहीं हो सका।
मथुरा-एटा मार्ग पर अभी भी निजी बसें चलती हैं। रोडवेज बस चलवाने का प्रयास सबसे पहले क्षेत्रीय विधायक छाबी मियां ने सन 1987 में किया था। लेकिन निजी बस संचालक उच्च न्यायालय से स्थगन आदेश ले आए। इसके बाद सन 2012 में क्षेत्रीय विधायक देवेन्द्र अग्रवाल ने भी कस्बा के अंदर बस लाने का प्रयास किया। उनके प्रयास से बसें आना प्रारंभ हो गई, लेकिन निजी बस संचालकों ने सवारियां लेना मुश्किल कर दिया। रोडवेज ने इस रूट पर घाटा दिखाते हुए एक माह के अंदर ही बसों का संचालन बंद कर दिया। कुछ दिनों के लिए मथुरा डिपो से एक बस सहपऊ से रोज आती जाती थी। लेकिन वह भी दो माह चली। अब केवल मथुरा-एटा मार्ग पर एक रोडवेज बस का संचालन हो रहा है। वह भी कस्बा में होकर नहीं गुजरती।
मैंने अपने कार्यकाल में कस्बा के अंदर होकर रोडवेज बसों को अंदर होकर गुजरने के लिए काफी प्रयास किए थे। निजी बस चालकों के व्यवधान के बाद कुछ नहीं हो पाया। इसके लिए धर्मशाला चौराहा से कस्बा के मार्ग के चौड़ीकरण कराने का कार्य कराया गया जिसको भी कुछ असामाजिक तत्वों ने रुकवाने के काफी प्रयास किए थे । इसके लिए उच्च न्यायालय तक लड़ाई लड़ी गई।
विपिन वशिष्ठ, पूर्व चेयरमैन सहपऊ।
हमने भी काफी प्रयास किया था लेकिन निजी बस संचालकों के उच्च न्यायालय के स्थगन आदेश के आने के बाद हमारे कार्यकाल समाप्त होने उपरांत किसी अन्य जनप्रतिनिधि ने कोई सक्रियता नहीं दिखाई
- दिनेश चंद्र शर्मा, पूर्व वाइस चेयरमैन सहपऊ।
नगर के अंदर से निजी बसों अथवा सरकारी बसों का नहीं गुजरना नगर के विकास में बाधक बना हुआ है। बसें अंदर आने पर कस्बा का काफी विकास हो सकता है।
- वीरेंद्र जैसवाल अध्यक्ष नगर कांग्रेस कमेटी