हाथरस में कस्बा पुरदिलनगर के देहात के इलाके में 14 मार्च को शव का जिस खेत में अंतिम संस्कार किया गया वो खेत विवादित रहा है। मृतक के ही वारिसानों के पास कभी पट्टे पर था। अदालत के निर्णय के बाद खेत पर पुराने जमींदार के वारिस का कब्जा है।
खेत आज भी जुता पड़ा है। वहां फसल जलने के कोई निशान मौजूद नहीं है। बताया जा रहा है कि शव को जलाने की मंशा श्मशान बनाने की नहीं थी और न ही शव को जलाते समय खेत में कोई फसल थी। पुलिस ने भी अज्ञात कारणों बिना जांच किये रिपोर्ट दर्ज कर ली।
कैलाश कुमार पुंढ़ीर पुत्र हरनाम सिंह निवासी अरूणा नगर जीटी रोड एटा ने 17 मार्च को कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप है कि उसकी ट्रस्ट शिवशंकर शनि देव महाराज की पुरदिलनगर में नांन जेड ऐ भूमि पर 14 मार्च को आरोपी हरिप्रकाश, राजेन्द्र, रामगोपाल, सतेंद्र, लेखपाल, पुत्रगण बाबू लाल, पवन, वीरेश पुत्रगण रामगोपाल, कुलदीप पुत्र हरिप्रकाश सभी निवासी गांव नवापुर थाना हसायन और 30 से ज्यादा अज्ञातों ने बाबूलाल का शव खेत के ट्यूबवैल के पास श्मशान बनाने के लिए जला दिया।
आरोपियों ने फसल को आग लगा दी। वहां कर्मचारी को मारा पीटा। मौके पर खेत में कोई फसल जली नहीं मिली। न ही किसी फसल के जलने के अवशेष या राख आदि मौजूद थे। कोतवाली पुलिस ने मौके पर नहीं जाकर सीधे रिपोर्ट दर्ज कर ली।
पुरिदलनगर चौकी प्रभारी दरोगा राजेश कुमार सरोज ने बताया कि जमीन की असली मालिक शिवरानी थी। नोन जेड ऐ श्रेणी की होने के कारण उसे बेचा नहीं जा सकता था। उन्होंने नाजमद बाबूलाल तथा उसके पुत्रों को पट्टे पर कभी जमीन दी थी। बाबूलाल का बेटा यहां खेती करता था। पटटे के आधार पर जमीन का बैनामा कराने पर विवाद शुरू हुआ था।
शिवरानी ने एसडीएम के यहां वाद दायर कर बैनामा निरस्त कर दिया। इसके बाद शिवरानी की मौत हो गई। जमीन की वसीयत वो अपने भतीजे के नाम कर गई। इसलिए जमीन के मालिक पुन: शिवरानी के भतीजे हो गए। क्योंकि बाबूलाल ने इस जमीन पर कभी खेती थी की इसलिए मरने के बाद उसके परिजन उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया था।