पति पत्नी के बीच विवाद प्रतीकात्मक
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भौतिक सुख-सुविधाओं के बढ़ते साधन, शिक्षा का बढ़ता ग्राफ भी पारिवारिक रिश्तों को बचाने में कारगर साबित नहीं हो पा रहा है। प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय की अदालत में मुकदमों का बोझ बढ़ता जा रहा है। वर्तमान में न्यायालय में विभिन्न प्रकृति के करीब 3132 मुकदमे विचाराधीन हैं, जबकि प्रतिदिन लगभग आठ से 10 मुकदमे दायर हो जाते हैं।
हाथरस में परिवार न्यायालय की एक ही अदालत है। परिवार न्यायालय में प्रधान न्यायाधीश के रूप में रविंद्र कुमार चतुर्थ ने मई माह में ही कार्यभार संभाला है। परिवार न्यायालय में अप्रैल माह में विभिन्न प्रकृति के 103 मुकदमे निस्तारित हुए हैं। अप्रैल महीने में 141 नए मुकदमे दायर हुए हैं। प्रतिदिन करीब आठ से 10 मुकदमे नए दायर हो जाते हैं।
परिवार न्यायालय में प्रतिदिन करीब 100 से 110 मुकदमे सुनवाई के लिए लगते हैं। प्रतिमाह करीब 170 से 180 विभिन्न प्रकृति के नए वाद दायर हो जाते हैं। वर्तमान में कुल विचाराधीन विभिन्न प्रकृति के वादों की संख्या करीब 3132 है। इसमें 1608 मुकदमे भरण पोषण से संबंधित हैं, जबकि 627 मुकदमे तलाक से संबंधित हैं।
हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 9 से संबंधित 631 मुकदमे हैं। यह आंकड़े यह प्रदर्शित करने के लिए पर्याप्त हैं कि वर्तमान में भारतीय जीवन मूल्य विघटित हो रहे हैं। माना जाता है कि पाश्चात्य सभ्यता का अंधानुकरण पारिवारिक विघटन का कारण बन रहा है। इसी वजह से दांपत्य विवादों से संबंधित मुकदमों का बोझ अदालत में बढ़ रहा है।