श्रेष्ठ कर्म यह नहीं कि कितना कमाते हैं, श्रेष्ठ कर्म यह है कि कैसे कमाते हैं। जो कमाया है, वह पीछे रह जाएगा। जैसे कमाया, वह साथ जाएगा। कार्य सेवाभाव से करना है तो सेवाभाव से करना चाहिए। धन दुआओं का कमाएंगे तो अन्न भी मन को शक्ति देगा।
यह विचार प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की मशहूर वक्ता बीके शिवानी ने मंगलवार को यहां अलीगढ़ रोड स्थित एक गेस्ट हाउस में आयोजित खुशियों का पासवर्ड आपके हाथ कार्यक्रम में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हम नौकरी करते हैं तो मन में मजबूरी के बोल बोलते हैं। अन्न को वैसे बनाइए, जैसे प्रसाद बनता है। प्रसाद बनता है, तन की भी सफाई और मन की भी सफाई। जैसा अन्न होता है, वैसा मन होता है।
उन्होंने कहा कि हम सबके कर्म अलग-अलग हैं तो उसके अनुसार हमारा भाग्य निर्धारित हो रहा है। अपना भाग्य खुद हम लिखते हैं। आज से एक लाइन पक्की करें ‘जो कुछ हो रहा है, वो मेरे कर्मों का परिणाम हैं। अपना भाग्य हम खुद लिखते हैं, बदलेंगे भी हम। उन्होंने कहा कि सोचकर सोचो कि क्या यह करने लायक है। कुछ बातें हमारे अनुसार होती हैं तो कुछ बातें हमारे अनुसार नहीं होतीं। अगर सबकुछ ईश्वर की मर्जी से हो रहा है तो सबका भाग्य कैसा होना चाहिए? अपने बच्चे के भाग्य में साल में कितनी बीमारी देखना चाहते हैं? यह मेरे साथ ऐसा इसलिए गलत करते हैं जब हमने कभी कुछ इनके साथ गलत किया था।
कार्यक्रम का शुभारंभ ज्योति जगा लो गीत की मधुर ध्वनि के मध्य ‘दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। सदर विधायक अंजुला माहौर, नगर पालिका अध्यक्ष श्वेता चौधरी, दिशा समिति के सदस्य केपी सिंह पौरुष, व्यापारी अमित अग्रवाल, ग्रुप कैप्टन डाॅ. जयपाल सिंह, नगर सह चालक आरएसएस डाॅ. पीपी सिंह, प्रेम सिंह एडवोकेट, डाॅ. भरत यादव, अनिल वार्ष्णेय, कन्या गुरुकुल की अधिष्ठात्री पवित्रा शर्मा, पूर्व सांसद राजेश दिवाकर, ब्लॉक प्रमुख रामेश्वर उपाध्याय आदि मौजूद थे। संचालन बीके शांता ने किया।