टिनशेड के बाहर खड़े परिवार के लोग। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी, सादाबाद। जब कोई गरीब, मजदूर आवास के लिए आंखों में उम्मीद और चेहरे पर जरूरत के हावभाव लिए सरकारी कार्यालय, अफसरों के चक्कर काटता नजर आता है तो जरूरतमंदों को छत मुहैया कराए जाने के लिए चलाई जा रही है प्रधानमंत्री आवास योजना बेमानी नजर आती है। क्षेत्र के गांव चमरपुरा की रहने वाली पांच बेटियों की मां और मजदूर की पत्नी खुशी देवी आवास आवंटन के लिए दर-दर भटक रही हैं।
मुख्यमंत्री को खुशी देवी की ओर से भेजी गई शिकायत में कहा गया है कि उनके पति राजकुमार मजदूरी करके पांच बेटियों और उसका पेट पालते हैं। गांव में रहने के लिए एक कमरा है। इसके ऊपर टूटा टिन शेड पड़ा है। बारिश के दिनों में छत से पानी टपकता है और गर्मियों में आग बरसती है।
तंगहाली से समझौता कर परिवार का पेट तो पल रहा है, लेकिन सिर पर छत का इंतजार बढ़ता ही जा रहा है। खुशी ने कुछ साल पहले प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवेदन किया था। कई महीने बीत गए उसे आवास आवंटित नहीं किया गया।
संपूर्ण समाधान दिवस, तहसील दिवस और प्रशासनिक अधिकारियों के यहां शिकायत देने के बाद भी गरीब परिवार को आवास नहीं मिला। कई बार आवासों का आवंटन हुआ। गांव के कई लोगों को आवासों का आवंटन हुआ, लेकिन खुशी की किस्मत नहीं चमकी। अफसरों की मिन्नतें करने के बाद आवास योजना का लाभ दिए जाने के लिए सर्वेयर टीम को राजकुमार के घर भेजा गया।
सर्वेयर टीम पर आरोप है कि आवास आवंटन के लिए मोटी रकम की मांग की गई थी। राजकुमार ने रकम देने में असमर्थता जाहिर की। इसके बाद सर्वेयर टीम को भी खुशी और राजकुमार की गरीबी पर तरस नहीं आया। टीम ने खुशी के आवेदन को अपात्र घोषित कर दिया। इसके बाद से लगातार खुशी और राजकुमार आवास आवंटन के लिए इस इस उम्मीद से सरकारी अफसर और कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं।