हाथरस। जिले के प्रसिद्ध मंदिर श्रीदाऊजी महाराज में आने वाले श्रद्धालुओं को अब बेहतर सुविधा मिलने की आस जगी है। पर्यटन विभाग की ओर से नगर पालिका परिषद क्षेत्र में 10 हजार वर्ग मीटर की भूमि पर तीर्थ सुविधा केंद्र का निर्माण किया जाएगा। इसे लेकर पर्यटन विभाग की ओर से प्रस्ताव तैयार केंद्र सरकार को भेजा जा रहा है। इस केंद्र के जरिये यहां आने वाले पर्यटकों व श्रद्धालुओं को मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी।
केंद्र सरकार पर्यटकों को बेहतर सुविधा देने की योजना पर कार्य कर रही है। इसके लिए पर्यटन विभाग जिले में तीर्थ सुविधा केंद्र, पर्यटक सुविधा केंद्र विकसित करने की योजना बना रहा है। जिले के किला क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध मंदिर श्रीदाऊजी महाराज को मिनी प्रसाद स्कीम के तहत विकसित किया जाएगा।
मंदिर परिसर के आस पास भूमि न होने की स्थिति में प्रशासन की ओर से नगर पालिका परिषद क्षेत्र में मंदिर के एक किलोमीटर के दायरे में इस तीर्थ सुविधा केंद्र के लिए भूमि का चयन कर लिया गया है। इस भूमि पर इस सुविधा केंद्र का निर्माण कराया जाएगा। इस केंद्र में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए एक ऑडिटोरियम भी बनाया जाएगा।
योजना के तहत मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं व पर्यटकों की हर सुविधा का ध्यान रखते हुए सुविधा केंद्र का खाका खींचा जा रहा है। जिला पर्यटन सूचना अधिकारी विशाल श्रीवास्तव ने बताया कि तीर्थ सुविधा केंद्र के लिए जिला प्रशासन की ओर से नगर पालिका परिषद को भूमि दिए जाने के लिए निर्देश जारी कर दिए गए हैं। केंद्र सरकार को इस सुविधा केंद्र के निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजा जा रहा है। संवाद
तीर्थ सुविधा केंद्र पर मिलेंगी यह सुविधाएं
तीर्थ सुविधा केंद्र पर पर्यटकों व श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने के लिए खाका खींचा जा रहा है। श्रद्धालुओं को इस केंद्र में विश्राम स्थल, पार्किंग, जूता घर, प्राथमिक चिकित्सा सुविधा, क्लॉक रूम, पेयजल सुविधा, शौचालय, हॉल, सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए स्थान आदि विकसित किया जाएगा। साथ ही एक प्रसाद काउंटर भी बनाया जाएगा।
क्या है मिनी प्रसाद योजना
केंद्र सरकार की ओर से तीर्थ स्थलों को विकसित करने के लिए मिनी प्रसाद योजना शुरू की गई। योजना धार्मिक पर्यटन अनुभव को समृद्ध करने के लिए तीर्थ स्थलों को विकसित करने और पहचान दिलाने पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य संपूर्ण धार्मिक पर्यटन अनुभव प्रदान करने के लिए तीर्थ स्थलों को प्राथमिकता, नियोजित और संधारनीय तरीके से एकीकृत करना है।