इस मौके पर कवि डॉ. मंजीत सिंह ने वाह रे हे बाबा साहब कमाल कर दिया, कुछ भी न थे मालामाल कर दिया, शोषितों को मान सम्मान दिलाया, संविधान लिखकर धमाल कर दिया, सुनाकर तालियां बटोरीं। कवि लाखन सिंह हलचल ने जो एकता की बात करते हैं, संसद में जूते चप्पल से लड़ते हैं, सुनाई। डॉ. रमेशचंद्र, संजय सेठ, सरदार सुरजीत, संजय सिंह, योगेश केशरी, जुगेंद्र चौधरी, डॉ. राहुल सिंह, सचिन आंबेडकर, प्रिंस आजाद, बंटी भैया, रामवीर भैयाजी, राजवीर सिंह, गया प्रसाद बाबा, विजय प्रेमी, पूरन सागर, संतोष पाल सिंह आदि थे।
मेला श्रीदाऊजी महाराज के पंडाल में दलित साहित्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। शुभारंभ पंकज प्रेमाकर ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। कवियों ने दलित चेतना से ओत-प्रोत कविताएं प्रस्तुत कीं।
मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व सांसद राजेश दिवाकर व सहायक आयुक्त देवेंद्रपाल सिंह रहे। इस मौके पर कवि डॉ. मंजीत सिंह ने वाह रे हे बाबा साहब कमाल कर दिया, कुछ भी न थे मालामाल कर दिया, शोषितों को मान सम्मान दिलाया, संविधान लिखकर धमाल कर दिया, सुनाकर तालियां बटोरीं। सुनीता बौद्ध ने कि पिला दो धर्म की घुट्टी कभी अधिकार न मांगेंगे, ओढ़कर लेटेंगे चादर न सोएंगे, न जागेंगे, सुनाई। कवि भगवान सिंह ने आओ सदियों के अंधेरों को मिटाओ लोगों, ज्ञान का दीप तो हर दिल में जलाओ लोगों, सुनाई।
कवि लाखन सिंह हलचल ने जो एकता की बात करते हैं, संसद में जूते चप्पल से लड़ते हैं, सुनाई। इस मौके पर डॉ. अनिल कुमार दिनकर, बुद्धेश आदि ने भी काव्यपाठ किया। डॉ. रमेशचंद्र, संजय सेठ, सरदार सुरजीत, संजय सिंह, योगेश केशरी, जुगेंद्र चौधरी, डॉ. राहुल सिंह, सचिन आंबेडकर, प्रिंस आजाद, बंटी भैया, रामवीर भैयाजी, राजवीर सिंह, गया प्रसाद बाबा, विजय प्रेमी, पूरन सागर, संतोष पाल सिंह आदि थे। संयोजक सुनील कुमार ने सभी का आभार व्यक्त किया। संवाद