न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
हाथरस को जिला बने 25 साल बीत गए हैं, लेकिन यहां के बाशिंदों को जाम की समस्या से जूझ रहे प्रमुख चौराहों पर यातायात नियंत्रण के लिए रेड, ग्रीन और यलो सिग्नल लाइट लगने का इंतजार है। आज भी शहर की यातायात व्यवस्था पुलिस कर्मियों के हाथ के इशारों से नियंत्रित होती है। इस व्यवस्था से न केवल यातायात पुलिस को मशक्कत करनी पड़ती है, बल्कि वाहन चालकों को भी बिना वजह से जाम का सामना करना पड़ताहै।
हालांकि हाल ही में जिले की यातायात व्यवस्था पुलिस के बॉडी कैमरा व कैशलेश मशीन से हाईटेक हुई है, लेकिन किसी भी चौराहे पर रेड लाइट और ग्रीन लाइट नहीं है। अब सर्दी के मौसम में दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ब्लैक स्पॉट से लेकर मुख्य मार्गों पर सचेतक की आवश्यकता है, ताकि दुर्घटनाओं में कमी आ सके।
उल्लेखनीय है कि हाथरस जिले में करीब 15 लाख की आबादी है। ढाई लाख से अधिक वाहन हर रोज सुबह से शाम तक सड़कों पर फर्राटा भरते हैं। खेदजनक पहलू यह है कि मुख्य मार्गों पर आज भी यातायात व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए स्वचालित व्यवस्था नहीं है।
तालाब चौराहा पर कई वर्ष पहले लगाई गईं सिग्नल लाइट दिखावटी बनकर रह गई हैं। शहर के अति व्यस्त तालाब चौराहे पर जब ओवरब्रिज का निर्माण नहीं हुआ तो यहां चारों तरफ यातायात को नियंत्रित करने के लिए लाल, हरी और पीली बत्ती लगाई गई थीं, लेकिन लगने के बाद यह लाइट चालू ही नहीं हो सकीं। धीरे-धीरे यह प्रयोग लायक भी नहीं रहीं। ओवर ब्रिज बनने के बाद इनका महत्व ही खत्म हो गया। वर्तमान में लगे खाली खंभे लोगों को मुंह चिढ़ा रहे हैं। संवाद
इन जगहों पर ट्रैफिक सिग्नल लाइट की जरूरत
शहर के गांधी पार्क, सासनी गेट चौराहा, नवीपुर चौराहा, डीआरबी इंटर कॉलेज, घंटाघर मोहनगंज, कस्बा सासनी में कोतवाली चौराहा, सादाबाद में बाईपास पर करवन नदी पुल पर यातायात व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए सिग्नल लाइट की जरूरत महसूस की जा रही है। यदि इन स्थानों पर लाइट लग जाए तो यातायात में काफी सुधार होगा। पुलिस कर्मियों को मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी। जाम से निजात मिलेगी।
यातायात पुलिस का अभियान केवल चालान तक सिमटा
इन-दिनों यातायात पुलिस का यातायात जागरूकता माह चल रहा है, लेकिन यह केवल वाहनों की चेकिंग और चालान काटने तक ही सीमित रह गया है। जिले में यातायात को व्यवस्थित करने के कोई खास इंतजाम पुलिस के पास नहीं हैं।