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हाथरस : आखिर कब मिलेगी हाथरस को प्रदूषण से आजादी

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हाथरस : आगरा मार्ग स्थित रजबहे में आता दूषित पानी। संवाद - फोटो : HATHRAS
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गौरव भारद्वाज
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हाथरस। वर्तमान में हम आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं, लेकिन बृज की देहरी को प्रदूषण से आजादी नहीं मिल रही। यह जिला और ज्यादा प्रदूषण की गिरफ्त में आ रहा है। ताज ट्रिपेजियम जोन (टीटीजेड) में आने के बावजूद यहां सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) के आदेश के कोई मायने नहीं हैं। वायु प्रदूषण के कारण लोगों का जीना दुश्वार है। जिले में औद्योगिक क्षेत्र तो बढ़ता जा रहा है, लेकिन यहां अधिकांश औद्योगिक इकाइयों के पास प्रदूषण रोकने के उपाय नहीं है।
जिले में खाद्य प्रसंस्करण के उद्योग, हींग, अचार, मुरब्बा, चिप्स, मसाले, नमकीन, सुपारी आदि उद्योग तो हैं ही। इसके साथ ही कॉटन, दाल आदि उद्योगों की भी यहां की पुरानी पहचान हैं। वर्तमान में हम आजादी का 75 वां महोत्सव मना रहे हैं, लेकिन यहां लोगों को प्रदूषण से मुक्ति नहीं मिल रही। शहर से लेकर गांव तक प्रदूषण पांव पसारता जा रहा है।
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इस बीच चप्पल, हार्डवेयर, बैटरी, ऑटोमोबाइल, गलीचा, रबड़ के सामान, दवाएं, रंग- गुलाल अन्य की फैक्टरियां खूब चल रही हैं। जिले में पांच औद्योगिक क्षेत्र हैं। इसमें अलीगढ़ रोड औद्योगिक क्षेत्र के अलावा सलेमपुर औद्योगिक क्षेत्र बड़े हैं। सादाबाद, सिकंदराराऊ, सहपऊ में मिनी औद्योगिक क्षेत्र हैं। इसके अलावा शहर व ग्रामीण क्षेत्र में भी कई फैक्टरियां चल रही हैं। संवाद
ऐसे प्रदूषण फैला रहीं औद्योगिक इकाइयां
इन सभी फैक्टरियाें के पास वायु और जल प्रदूषण कम करने के लिए उपकरण नहीं लगे हैं। बिना ट्रीटमेंट के हवा में फैक्टरियों से निकलने वाला धुआं छोड़ा जा रहा है। इनमें नाइट्रो बैजीन, सल्फर डाई आक्साइड व अन्य जहरीली गैस खुले में छोड़ी जाती है। इन फैक्टरियों से काला धुआं निकलता है। रंग, गलीचा और चादर बनाने वालों के अलावा निकिल व पॉलिश के प्लांटों से भी खुले में बिना ट्रीटमेंट के पानी नालियों में बह रहा है। खाद्य प्रसंस्करण फैक्टरियां भी अपना कचरा आसपास खुले में बहा रही हैं। कुछ फैक्टरिर्यां इंधन के रूप में रबड़ जला रही हैं।
कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का दफ्तर अलीगढ़ में है। वहां से समय-समय पर विभागीय अधिकारी या तो बैठक में भाग लेने के लिए आते हैं या फिर जांच करने आते हैं। कब नमूने ले जाते हैं और क्या कार्रवाई हुई, इसका पता नहीं चलता है। एयर क्वालटी इंडेक्स मापने के लिए शहर के कलवारी रोड पर उपकरण लगा हुआ है। इनकी रिपोर्ट नहीं मिल पाती है।
सासनी का नाला परोस रहा बीमारियां
अलीगढ़ से इगलास होते हुए सासनी की सीमा से अलीगढ़ ड्रेन गुजरता है। इन नाले का पानी इतना गंदा है कि देखने में काला लगता है। इस नाले के पास से बड़े बड़े लोग नाक बंद करके निकलते हैं। इस पानी से आसपास के किसान सिंचाई भी करते हैं। यहां रहने वाले लोग बीमार हो रहे हैं।
प्रदूषण दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है। आव-ओ-हवा को खराब करने वालों पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कोई नियंत्रण नहीं है। इस कारण जिले में प्रदूषण का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। जब हवा शुद्ध होगी तो बीमारियां भी नहीं आएंगी। इसके लिए पर्याप्त इंतजाम की जरूरत है।
-आशु शर्मा, शहरवासी
जब पर्यावरण शुद्ध हो तो आमजन को काफी राहत मिलेगी। सादाबाद से सासनी तक राजमार्ग पर बसें धुआं उगलती हैं। शहर में मार्ग संकरे होने के जाम लगता है। शहर के अंदर चार पहिया व दो पहिया वाहन धुआं फैला रहे हैं। जरूरत है कचरा जलाने को रोकने की।
-डॉ. विनोद पाठक
दिन-प्रतिदिन प्रदूषण बढ़ रहा है। इस पर लगाम लगाने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं। जो औद्योगिक इकाइयां गंदगी फैला रही हैं, उन पर कार्रवाई की जाए। शहर में किसी सार्वजनकि स्थल पर एयर इंडेक्स यंत्र लगाया जाए, ताकि लोग प्रदूषण के प्रति जागरूक हों।
-रमाकांत शर्मा
कस्बे में होकर गुजर रहे नाले ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। नाले के आसपास के लोग भयंकर बीमारी की चपेट में हैं। ये नाला कई लोगों की जिंदगी निगल चुका है। इस समस्या को लेकर शासन स्तर से ठोस कदम उठाने चाहिए, ताकि लोगों को राहत मिल सके।
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-प्रकाशचंद्र शर्मा, सासनी
वर्तमान में एयर इंडेक्स 90 माइक्रो प्रतिघन मीटर है। वैसे मानक 100 का है। कलवारी रोड, सादाबाद में कई ऐसी औद्योगिक इकाइयों को नोटिस दिए गए हैं, जो प्रदूषण फैला रही हैं। करवन नदी, सासनी नाला और जैतई आदि स्थानों से नमूने लेकर रिपोर्ट भेजी गई है। नमामि गंगे मिशन के तहत प्रदूषण का कम करने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।
-जेपी सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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