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हाथरस : आयुर्वेदिक अस्पताल में बाजरा-मक्का का हो रहा इलाज

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कौमरी के आयुर्वेदिक अस्पताल परिसर में सूखता बाजरा। संवाद - फोटो : SASNI
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सासनी/हाथरस।
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क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं। सासनी का आयुर्वेदिक व यूनानी चिकित्सालय इसका उदाहरण है। वर्ष 1978 में निर्मित इस अस्पताल में आजकल पशु बंधे हुए हैं और लोग मक्का व बाजरा सुखा रहे हैं। अस्पताल में बिजली तक नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल में कोई चिकित्सक नहीं बैठता और ऐसे में उन्हें मामूली बीमारी होने पर उपचार के लिए काफी दूर जाना पड़ता है।
सासनी क्षेत्र के गांव कौमरी में आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सालय का निर्माण वर्ष 1978 में हुआ था। वर्तमान में अस्पताल का भवन जर्जर हालत में है और चारदीवारी भी टूटी है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से यहां किसी चिकित्सक को उपचार करते नहीं देखा। वर्तमान में अस्पताल में मक्का और बाजरा सूख रहा है।
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अस्पताल परिसर में ग्रामीणों ने अपने पशु बांध रखे हैं। वर्ष 2007 में तत्कालीन सांसद किशनलाल दिलेर ने अपनी सांसद निधि से आयुर्वेदिक अस्पताल की सड़क का निर्माण कराया था। इसके बाद इसकी देखरेख पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। संवाद
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इस अस्पताल में कोई चिकित्सक नहीं आता। इसकी देखरेख करने वाला कोई नहीं है। अस्पताल में मक्का, बाजरा सुखाया जाने लगा है।
-कुलदीप चौधरी, पंचायत सहायक
अस्पताल की चारदीवारी टूटी है। अस्पताल जब से खुला है, इसमें किसी की तैनाती ही नहीं हुई। उपचार के लिए दूर-दराज जाना पड़ता है।
-सोवरन सिंह छोंकर, ग्रामीण
यह अस्पताल केवल नाम का है। इसमें किसी की तैनाती ही नहीं है। बस कहने को ही स्वास्थ्य केंद्र है। यहां न इलाज मिलता है और न ही दवाएं।
-गोवर्धन सिंह, ग्रामीण
अस्पताल की चारदीवारी टूटी है। चिकित्सक यहां बैठते नहीं हैं। अन्य सुविधाओं का भी संकट है। जरा सी बीमारी पर लोगों को अन्य स्थानों पर जाना पड़ता है।
-इंद्रवीर सिंह सेंगर, ग्रामीण
मेरी तैनाती ऊसवा के आयुर्वेदिक हॉस्पिटल में है। मुझे सप्ताह में दो दिन राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय कौमरी में शुक्रवार और शनिवार संबद्ध किया गया है। रविवार को मुख्यमंत्री आरोग्य स्वास्थ्य मेला में ड्यूटी रहती है। इस कारण शनिवार को अवकाश मिलता है। मैं समय से निश्चित दिनों पर चिकित्सालय जाता हूं और मरीजों को देखता हूं। कर्मचारी द्वारा भी चिकित्सालय समय से खोला जाता है। चिकित्सालय परिसर की चारदीवारी टूटी होने के कारण ग्रामीणों ने मेरी अनुपस्थिति में ट्रैक्टर पशु व अनाज आदि सामान रख दिया गया है। मना करने पर झगड़ा करते हैं। चिकित्सालय परिसर की दीवार बनवाने के लिए कार्यालय को लिख चुका हूं। चिकित्सालय का नवीन भवन बनाने का प्रस्ताव भी दिया जा चुका है
-डॉ. नवनीत कुमार, चिकित्सक
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