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हाथरस : चावल मिल स्वामी के पक्ष में लामबंद हुए व्यापारी, प्रशासन की कार्रवाई पर गुस्साए

सार

मिल परिसर में मौजूद सारे स्टॉक, जिसमें बासमती चावल, सेला चावल, कच्चा चावल सभी तरह का चावल था, उसे सरकारी मान लिया गया और बिना किसी जांच-पड़ताल के तुरंत मिल को सीज करने की कार्रवाई कर दी गई और मंडी ने लाइसेंस निरस्त कर दिया। पुनीत ने बताया कि कि मौके पर मुझे जो आदेश दिया गया, उसमें भी मैंने स्पष्ट रूप से लिखा है कि मुझसे कोई भी प्रपत्र नहीं मांगा गया और मौके पर सभी कागजात मौजूद हैं। इस मौके पर उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के पदाधिकारियों में विष्णु गौतम, अनिल वार्ष्णेय, कन्हैयालाल अग्रवाल, कपिल अग्रवाल, नरेंद्र बंसल, उमाशंकर, प्रवीण वार्ष्णेय, सुरेंद्र वार्ष्णेय आदि मौजूद थे।
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हाथरस : व्यापारी नेताओं के साथ वार्ता करते राइस मिल स्वामी पुनीत अग्रवाल। संवाद - फोटो : HATHRAS
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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चावल मिल पर छापेमारी और इसे सीज करने के बाद मुकदमा दर्ज करने के उपरांत पुलिस जहां विवेचना कर रही है। वहीं व्यापारी संगठन मिल स्वामी के पक्ष में लामबंद हो गए हैं। मिल स्वामी का कहना है कि छापे के दौरान उससे कोई भी प्रपत्र नहीं मांगा गया और उसका पक्ष सुने बिना ही पूरे मिल को सील कर दिया गया। उसने इस पूरी कार्यवाही को गलत करार दिया है।
उल्लेखनीय है कि तीन दिन पहले एडीएम बसंत अग्रवाल की अगुवाई में प्रशासन और आपूर्ति विभाग की टीम ने सासनी में बरसै के निकट एक चावल मिल पर छापा मारा था। वहां से सरकारी राशन के चावल के 24 हजार बोरे बरामद होने की बात कही गई थी। पूरे मिल को सील कर दिया गया था और मिल स्वामी पुनीत अग्रवाल निवासी मोहनगंज हाथरस के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया गया था। इस मामले में पुलिस विवेचना कर रही है। वहीं अब मिल स्वामी के पक्ष में व्यापारी संगठन लामबंद हो गए हैं।
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मिल स्वामी पुनीत अग्रवाल ने यहां व्यापार मंडल के पदाधिकारियों की मौजूदगी में पत्रकारों से वार्ता की। उन्होंने कहा कि 26 सितंबर को दोपहर साढ़े 12 बजे एक लाल रंग के ट्रैक्टर पर कुछ बौरे चावल के लदे थे। अचानक यह ट्रैक्टर मिल में घुस आया। उसके पीछे-पीछे कुछ लोग आ गए। वह लगातार फोन करने लगे। इस दौरान वहां अधिकारी आ गए और वहां जांच पड़ताल में लग गए। पुनीत ने बताया कि हमसे इन अधिकारियों ने कोई प्रपत्र नहीं मांगा।
मिल परिसर में मौजूद सारे स्टॉक, जिसमें बासमती चावल, सेला चावल, कच्चा चावल सभी तरह का चावल था, उसे सरकारी मान लिया गया और बिना किसी जांच-पड़ताल के तुरंत मिल को सीज करने की कार्रवाई कर दी गई और मंडी ने लाइसेंस निरस्त कर दिया। पुनीत ने बताया कि सभी चावल धान से मिलिंग किया हुआ था। धान खरीद के सभी बिल मय मंडी नौ आर, गेटपास तथा प्रवेश पर्ची के मौजूद हैं।सभी धान खरीद और बेचने का भुगतान बैंक के माध्यम से हुआ है। कोई भी चावल सरकारी नहीं है।
पुनीत ने बताया कि कि मौके पर मुझे जो आदेश दिया गया, उसमें भी मैंने स्पष्ट रूप से लिखा है कि मुझसे कोई भी प्रपत्र नहीं मांगा गया और मौके पर सभी कागजात मौजूद हैं। उसने बताया कि जिस चावल को अन्य प्रदेशों का बताया जा रहा है, वह बोरों के मार्का देखकर बताया जा रहा है, जबकि इस प्रकार के बोरों में माल भरने का प्रचलन है। सरकारी चावल, गेहूं, चीनी आदि के बोरे खाली होने के बाद बाजार में बिकते हैं और भरने के काम आते हैं। उसने बताया कि मंडी सचिव के आदेश में भी एक ट्रैक्टर का जिक्र है। वह ट्रैक्टर प्रशासन के कब्जे में है, जबकि उनके पूरे मिल को सील कर दिया गया है।
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इस मौके पर उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के पदाधिकारियों में विष्णु गौतम, अनिल वार्ष्णेय, कन्हैयालाल अग्रवाल, कपिल अग्रवाल, नरेंद्र बंसल, उमाशंकर, प्रवीण वार्ष्णेय, सुरेंद्र वार्ष्णेय आदि मौजूद थे। इस मौके पर इन व्यापारी नेताओं ने प्रशासन की इस कार्रवाई पर आक्रोश जताया। संवाद
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