हाथरस : टैंकर से गैस का रिसाव बंद करते बीपीसीएल के तकनीशियन। संवाद
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिकंदराराऊ (हाथरस)
टैंकर पलटने से हुए गैस रिसाव के दौरान आसपास के गांवों में दहशत का माहौल बन गया। आग लगने के डर से लोग अपने गांव से दूर चले गए। चूंकि गैस हवा में घूम रही थी, इसलिए मारे डर के लोगों ने घरों के चूल्हे तो दूर, बीड़ी-सिगरेट तक नहीं जलाए। आसपास के चाय और ढाबा मालिक भी अपने प्रतिष्ठान बंद करके चले गए। टैंकर को सीधा करने के लिए क्रेनों का इंतजाम करने में कई घंटे लग गए, वरना गैस का रिसाव और पहले बंद कर दिया जाता। सच कहें तो इस घटना ने अग्नि सुरक्षा के इंतजामों की कलई एक बार फिर खोल दी है।
हालांकि प्रशासन ने रात में तो गैस के रिसाव की बात गुप्त रखी, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से सुबह होते ही आसपास के आधा दर्जन गांवों में इसके लिए चेतावनी जारी कर दी गई। चेतावनी के बाद ग्रामीण इतना डर गए कि घरों में चूल्हे तक नहीं सुलगाए गए। अधिकांश दुर्घटनाओं में मौके पर काफी भीड़ जमा हो जाती है, लेकिन इस मामले में कोई घटनास्थल पर झांकने नहीं आया। डिग्री कॉलेज की भी छुट्टी थी। गांव वालों में डर का यह आलम था कि उन्होंने बीड़ी, सिगरेट तक नहीं सुलगाई। दोपहर दो बजे तक ग्रामीणों को भय के रहना पड़ा। संवाद
क्रेन के इंतजार में रिसाव बंद करने में लगा ज्यादा समय
सबसे ज्यादा दिक्कत क्रेन के इंतजाम को लेकर रही। राजमार्ग की निर्माणदास्यी संस्था ब्रजगोपाल कंस्ट्रक्शन से बड़ा हाइड्रा मंगवा लिया गया, लेकिन उसकी क्षमता केवल 10 टन वजन उठाने की थी, जबकि टैंकर को सीधा करने के लिए करीब 20 टन वजन उठाने वाली क्रेन की जरूरत थी। मौके पहुंचीं दमकल की चार गाड़ियां लगातार गैस के टैंकर पर पानी की तेज बौछार कर रही थीं। जैसे ही गाड़ियां खाली हो जातीं तो तुरंत एक गाड़ी पानी लाकर इन टैंकरों को भर देती। दोपहर 12 बजे बाहर से बड़ी क्रेन। उसकी मदद से टैंकर के अगले हिस्से को ऊपर उठाने के बाद पाइंट से गैस का रिसाव बंद किया गया। संवाद