न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
देश-विदेश में भोजन को महका रही हाथरस की हींग की खुशबू पर महंगाई की मार पड़ रही है। कई बाहरी देशों से हींग बनाने में प्रयोग होने वाला कच्चा माल इस बार महंगे दामों पर मिल रहा है। इस बार कजाकिस्तान में एसाफोइटिडा की फसल नहीं हुई है। इसकी वजह से उद्यमियों को कच्चा माल महंगा मिल रहा है। कच्चे माल के दाम बढ़ने से हींग के कारोबार पर 25 प्रतिशत तक असर पड़ा है और हींग उद्यमियों की मुश्किलें बढ़ी हैं।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार ने हींग को एक जनपद-एक उत्पाद (ओडीओपी) में शामिल किया है। कच्चे माल के आयात शुल्क को भी हटा दिया गया है। इसके बाद यहां के हींग उद्यमी अब कच्चे माल की समस्या से जूझ रहे हैं। हींग बनाने के लिए कच्चा माल अफगानिस्तान, ईरान, उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान से आता है। इन देशों में हींग का दूध (एसफोइटीडा) कच्चा माल दिल्ली और मुंबई के कारोबारियों की मदद से आता है।
यहां के हींग उद्यमियों का कहना है कि इस बार कजाकिस्तान में हींग की फसल नहीं हुई है, जबकि वहीं का कच्चा माल काफी अच्छा माना जाता है। ऐसे में कच्चे माल की आवक कम हुई और दाम बढ़ गए हैं। हींग के कच्चे माल का दाम पहले आठ से 10 हजार रुपये प्रति किग्रा था। अब 15 से 20 हजार रुपये प्रति किलो हो गया है। साथ ही बिक्री भी 25 प्रतिशत तक प्रभावित हुई है।
हींग तैयार करने के लिए अन्य देशों से जो माल आता है, उसके दाम दोगुने हो गए हैं। जब कच्चा माल महंगा हुआ है तो हींग पर भी महंगाई आई है। ऐसे में बिक्री भी 25 प्रतिशत प्रभावित है।
-पंकज अग्रवाल, हींग कारोबारी
यहां कजाकिस्तान से सबसे ज्यादा कच्चा माल आता था, लेकिन इस बार वहां फसल नहीं हुई। अन्य मुल्कों से महंगी कीमत पर कच्चा माल आ रहा है। हींग के दाम डेढ़ महीने में 20 प्रतिशत बढ़ गए हैं।
-मनोज अग्रवाल, हींग कारोबारी