न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
इस बार होली पर इस बार भगवा रंग खूब जमेगा। हाथरस के विख्यात रंग-गुलाल उद्योग ने कमर कस ली है। कारखानों में रंग-गुलाल बनाने का काम तेजी से चल रहा है। निर्माताओं का कहना है कि सबसे ज्यादा मांग भगवा रंग की है। उन्हें इस होली पर गुलाल और रंग की भारी खपत की उम्मीद है।
हाथरस के गुलाल और रंग की मांग दूर-दूर तक है। फिल्मी दुनिया में भी होली पर हाथरस का रंग उड़ता है। अब होली में दो माह से भी कम समय बचा है। ऐसे में यहां रंग और गुलाल के कारखानों में तेजी से काम चल रहा है। बाहर से आर्डर भी आने शुरू हो गए हैं और उसी हिसाब से माल तैयार कराया जा रहा है। वैसे पिछले कई साल से सबसे मांग भगवा गुलाल और रंग की है। इस बार भी कारखानों में भगवा गुलाल और रंग के ही आर्डर आ रहे हैं। संवाद
दो शिफ्टों में चल रहा कारखानों में काम
शहर में गुलाल और रंग के 12 से अधिक छोटे-बड़े कारखाने हैं। करीब आठ हजार लोग इस उद्योग से जुड़े हैं। भारी मांग को पूरा करने के लिए कारखानों में दो शिफ्टों में काम चल रहा है।
इस तरह बनता है रंग-गुलाल
उद्यमी बताते हैं कि स्टार्च अथवा शेलखड़ी में रंग मिलाकर गुलाल तैयार किया है। कच्चा माल दिल्ली, अहमदाबाद, सोनीपत, पानीपत आदि जगहों से आता है। फिर यहां होली खेलने वाले रंग तैयार किए जाते हैं।
इस बार गुलाल की मांग ज्यादा है। कोरोना के चलते कारोबार बेपटरी हो गया था। इस बार कारोबार में बूम की उम्मीद है। उम्मीद है कि लोग खुलकर होली खेेलेंगे। इसलिए आर्डर भी सही आ रहे हैं। हाथरस का गुलाल और रंग काफी दूर-दूर तक जाता है।
कृष्णा गर्ग, रंग उद्यमी।
यहां के रंग की मांग बॉलीवुड तक रहती है। सबसे ज्यादा डिमांड भगवा रंग के गुलाल की है। अभी तक जो आर्डर मिले हैं, उसमें आधा माल तो भगवा रंग के गुलाल का आया है। आर्डर के हिसाब से माल तैयार कराया जा रहा है।
विनोद मित्तल कुमार , रंग उद्यमी।
गुलाल-रंग तैयार करने का काम शुरू हो गया है। सबसे ज्यादा डिमांड भगवा रंग की है। दो साल से कोरोना था और लोग खुलकर होली नहीं खेल पा रहे थे। इस बार लोग खुलकर होली खेलेंगे। ऐसे में कोरोना में हुए घाटे से उबरने की उम्मीद है।
देवेंद्र गोयल, रंग उद्यमी।