न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
प्रकाश का पहरा और ढेर सारी खुशियां लेकर दिवाली का त्योहार आ गया है। जिलेभर में सोमवार को धूमधाम से दीपोत्सव मनाया जाएगा। शनिवार को त्योहार के लिए दिन भर जरूरी सामान की खरीदारी की गई। लोगों ने पकवानों के साथ पूजा-पाठ का सामान भी जुटाया। पूजन के समय को लेकर जरूर भ्रम की स्थिति है, लेकिन अधिकतर धर्माचार्य प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजन को कल्याणकारी बता रहे हैं।
इस बार पांच शुभ मुहूर्तों ने पूजन की महत्ता बढ़ा दी है। बिहारवासी, हस्त नक्षत्र, चित्रा नक्षत्र और विषकुंभी योग में दिवाली का पर्व मनाया जाएगा। घर, दुकान और प्रतिष्ठानों के साथ मंदिरों में भी लक्ष्मी-गणेश की स्तुति कर सर्वकल्याण की कामना की जाएगी। दिवाली पर बन रहे योग को धर्माचार्य श्रेष्ठ बता रहे हैं।
इस बार लक्ष्मी पूजन और कल्याणकारी होगा। शाम को छह बजे से सवा आठ बजे तक पूजन का शुभ समय है। घर, दुकान और में देवालयों की सजावट भी हो चुकी है। जगह-जगह रंग बिरंगी झालरों की दिवाली को लेकर उत्साह का अहसास करा रही हैं। दिवाली के अगले दिन मंगलवार क सूर्य ग्रहण रहेगा, इसलिए गोवर्धन पूजा बुधवार को होगी। रविवार को नरक चतुर्दशी मनाई गई। घरों में पूजन कर सुख-समृद्धि की कामना की गई। संवाद
सुबह अमृत बेला से रात तक पूजन रहेगा शुभ
सुबह छह बजकर छह मिनट से सात बजकर 24 अमृत मुहूर्त। सुबह आठ बजकर 54 मिनट से 10 बजकर 18 मिनट तक शुभ मुहूर्त रहेगा। दोपहर दो बजकर 30 मिनट से तीन बजकर 54 मिनट लाभ मुहूर्त स्थिर लग्न। शाम तीन बजकर 54 मिनट पांच बजकर 18 मिनट तक अमृत मुहूर्त रहेगा। रात्रि नौ बजकर 30 मिनट से 11 बजे तक लाभ का मुहूर्त श्रेष्ठ रहेगा। रात्रि 12 बजकर आठ मिनट से रात डेढ़ बजे तक शुभ मुहूर्त रहेगा। रात्रि डेढ़ बजे से तीन बजे तक अमृत मुहूर्त स्थिर लग्न रहेग्रा, फिर अमावस्या लग जाएगी।
इस बार दिवाली पर जो योग बन रहे हैं, वह आमजन के लिए कल्याणकारी होंगे। अमृत बेला का पूजन विद्यार्थियों व किसानों के लिए काफी शुभ होगा। शाम को प्रदोष काल में पूजा घरों व प्रतिष्ठानों पर सुख समृद्धि प्रदान करेगी। रात्रि में जागरण करने से मां लक्ष्मी खुश होती है। शाम पांच बजे से अमावस्या लग जाएगी। अगले दिन ग्रहण के चलते गोवर्धन पूजा बुधवार को होगी।
-सुरेंद्रनाथ चतुर्वेदी
दिवाली पर रात्रि में जागरण करना शुभ रहेगा। विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें। घर के हर कोने में दीपक जलाएं। प्रदोषकाल में दिवाली पर्व मनाया जाएगा। लक्ष्मी पूजन प्रदोषयुक्त अमावस्या को स्थिर लग्न में किया जाना अति शुभ रहेगा। ग्रहण के चलते चौकी को लगी रहने दें। पूजन के दौरान पंच मेवा का मां लक्ष्मी भगवान गणेश का भोग लगाए।
-बल्लभजी महाराज
दिवाली को ये गलती न करें
आचार्य बल्लभ जी महाराज ने बताया कि दिवाली के दिन संध्या काल में झाडू न लगाएं। जूते अथवा चप्पल पहनकर रसोई में न जाएं। दिवाली के दिन सोने से पहले झूठे बर्तन न रखें। बर्तनों को साफ करके रखें। स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें। जलते हुए दीपक में मुंह से फूंक न मारें। इसके अलावा पूजन के दौरान मन में भगवान का ध्यान रहे।