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हाथरस : अंग्रेज इंतजार करते रह गए, सभा को संबोधित कर चले गए मुंशी गजाधर सिंह

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स्वाधीनता सैनानी मुंशी गजाधर सिंह का फाइल फोटो। संवाद - फोटो : HATHRAS
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गोविंद उपाध्याय, हाथरस।
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देश की आजादी में जिले के कई स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने अपनी भागीदारी की। इन्हीं स्वतंत्रता सेनानियों में से एक नाम हैं मुंशी गजाधर सिंह का। मुंशी जी आजादी के आंदोलन में बढ़ चढ़कर भाग लिया। आजादी की जंग में वह छह साल से ज्यादा जेल में रहे। इतना ही नहीं आजादी की जंग के लिए मुंशी जी ने और लोगों को भी प्रेरित किया। अंग्रेजों का खुफिया तंत्र इन्हें पकड़ने का इंतजार करता रह गया और वे सभा को संबोधित कर चले गए। उनके जाने के बाद अंग्रेजों को पता चला तो उन्होंने सिर पकड़ लिया।
सिकंदराराऊ के गांव खुशहाल गढ़ में एक किसान परिवार में 25 दिसंबर 1895 को मुंशी गजाधर सिंह का जन्म हुआ। वर्ष 1923-24 में जब मुंशी जी ने जिले के गांव शेखुपुर अजीत में अध्यापन कार्य आरंभ किया अभी अध्यापन कार्य करते हुए उन्हें एक वर्ष भी नहीं हुआ था कि स्वतंत्रता संग्राम की आंधी ने उनके मन को झकझोर दिया।
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अध्यापन कार्य छोड़कर पूर्ण रूप से आजादी के आंदोलन में कूद पड़े। मुंशी जी की पत्नी व दो बेटियों का इसी दौरान निधन हो गया। फिर भी मुंशी जी ने हिम्मत नहीं हारी और स्वतंत्रता के लिए कई बार जेल की कठोर यातनाएं सही। देश के लिए सर्वस्व न्योछावर करने वाले, समाज के लिए अनवरत संघर्ष करने वाले महान कर्मठ योद्धा ने 26 नवंबर 1973 को इस दुनियां से विदा ले ली।
मुंशी जी ने शिक्षा की जगाई अलख
हाथरस। मुंशी गजाधर सिंह शिक्षा पर बहुत जोर देते थे। उन्होंने कई गरीब बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने के लिए सहयोग प्रदान किया। उन्हीं के साथ प्रयासों से गांव कौमरी का मुंशी गजाधर सिंह जनता इंटर कॉलेज प्राइमरी पाठशाला के रूप में स्थापित किया गया। यह वर्तमान में इंटर कॉलेज है।
जिस सम्मान के हकदार थे वह नहीं मिला
हाथरस। मुंशी जी ने स्वतंत्रता आंदोलन में 75 महीने जेल में रहे। मुंशी जी को इसी कारण नागरिक परिषद अलीगढ़ के तत्वावधान में भारत सरकार के तत्कालीन जहाज रानी मंत्री ने उनका नागरिक अभिनंदन धर्म समाज कॉलेज के प्रांगण में 22 अगस्त 1973 को किया। उनके परिजनों का कहना है कि महान स्वतंत्रता सेनानी मुंशी गजाधर से जिस सम्मान के हकदार थे, वह उन्हें नहीं मिला।
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अंग्रेजी हुकूमत में छद्म वेश से संबोधित की थी सभा
हाथरस। 1945 में पुलिस को मुंशी गजाधर सिंह की तलाश में थी। खुफिया तंत्र उन्हें पकड़ने की फिराक में था। बघराया में मुंशी जी की सभा होनी थी। खुफिया तंत्र अलर्ट था। हजारों की भीड़ थी। तभी घोषणा हुई कि मुंशी गजाधर सिंह की आने में अभी देर है, तब तक गजुआ किसान सभा को संबोधित करेगा। गजुआ किसान ने सभा को संबोधित किया और चला गया। खुफिया तंत्र देखता ही रह गया। उसे बाद में पता चला कि गजुआ किसान ही मुंशी गजाधर सिंह थे। संवाद
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