गांव मीतई में क्षतिग्रस्त अवस्था में शहीद जहूर खां की कब्र। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
कारगिल युद्ध के बाद ऑपरेशन रक्षक में शहीद हुए गांव मीतई निवासी जहूर खां के परिजनों की 20 साल बाद भी कोई सुध लेने वाला नहीं है। शहादत के इतने साल बाद भी प्रशासन की ओर जहूर खां के परिजनों को कोई मदद नहीं मिली है। यहां तक की उनकी कब्र की देखभाल करने वाला कोई नहीं है। कब्र के आसपास अतिक्रमण का बोलबाला है। परिजनों को इस बात की टीस है।
कारगिल दिवस के बाद जब ऑपरेशन रक्षक चला तो इसमें सेना की ओर से चार ग्रेनेडियर में तैनात जहूर खां भी 17 अक्तूबर 2002 को शहीद हुए। वे गांव मीतई के रहने वाले थे, जबकि उनका परिवार वर्षों से मोहल्ला मधुगढ़ी इगलास अड्डा के निकट मोहल्ला नई दिल्ली में रह रहा है।
जहूर खां अपने पीछे पत्नी हाजरा बेगम के साथ छह बच्चों को छोड़ गए। जहूर की शहादत के समय तमाम वादे किए गए, लेकिन अब तक उनके परिवार को कोई सरकारी मदद नहीं मिली है। इस कारण जहूर खां के बच्चे गुरबत की जिदंगी जी रहे हैं। जहूर खां की पत्नी का कहना है कि आज तक प्रशासन की ओर से कोई मदद नहीं मिली है। कब्र को अपने पैसों से पक्का कराया। अब कब्र के पास बालू बदरफुट डालकर कुछ लोगों ने कब्जा कर रखा है। वहां गंदगी रहती है।