फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हाथरस : नौकरी के नाम पर 12 लाख रुपये ठगे

सार

पीड़ित को नौकरी के लिए छह महीने का प्रशिक्षण दिलाया गया, लेकिन उसे नियुक्ति पत्र नहीं मिला। कोतवाली हाथरस जंक्शन में तहरीर देते हुए गांव बघराया निवासी कुलदीप कुमार ने कहा है कि ठगी करने वाले ने मोबाइल के माध्यम से विज्ञापन पढ़वाया, जिसमें उत्तर प्रदेश जल निगम सरकार का उपक्रम (ग्रामीण जल सुधार परिषद उत्तर प्रदेश लखनऊ ) में मुंशी (लिपिक) की रिक्तियां निकलने की बात कही गई। शेष पांच लाख रुपये प्रशिक्षण के समय ले लिए गए और प्रशिक्षण माह जून 2022 में पूरा करा दिया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
विज्ञापन

कोतवाली हाथरस जंक्शन क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति के साथ नौकरी के नाम पर 12 लाख रुपये की ठगी करने का मामला सामने आया है। शिकायत के मुताबिक ठगी योजनाबद्ध तरीके से की गई। पीड़ित को नौकरी के लिए छह महीने का प्रशिक्षण दिलाया गया, लेकिन उसे नियुक्ति पत्र नहीं मिला। अब पुलिस से शिकायत की गई है।
कोतवाली हाथरस जंक्शन में तहरीर देते हुए गांव बघराया निवासी कुलदीप कुमार ने कहा है कि ठगी करने वाले ने मोबाइल के माध्यम से विज्ञापन पढ़वाया, जिसमें उत्तर प्रदेश जल निगम सरकार का उपक्रम (ग्रामीण जल सुधार परिषद उत्तर प्रदेश लखनऊ ) में मुंशी (लिपिक) की रिक्तियां निकलने की बात कही गई। इसके बारे में पूरी जानकारी जिला बागपत निवासी एक व्यक्ति ने दी। आरोपी को भारत विकास अभियान ट्रस्ट (रजि) वूमेन एमपावरमैन ऑल इंडिया व फंड कोआर्डिनेटर (एनजीओ) का अध्यक्ष बताया गया है।
विज्ञापन

आरोपी ने सलेमपुर में आकर नौकरी दिलाने की गारंटी लेते हुए बतौर जमानत छह लाख रुपये प्रति व्यक्ति देने को कहा। कुलदीप ने अपने बेरोजगार बहनोई निक्की कुमार पुत्र सुरेंद्र सिंह निवासी छौंक थाना हाथरस जंक्शन को बुला लिया। अपने भविष्य को देखते हुए निक्की आरोपी की मीठी बातों में आ गए और उसको करीब 7,49,000 रुपये बैंक के माध्यम से उसके बैंक खातों में भेज दिए।
लखनऊ बुलाकर पीड़ित को छह माह का प्रशिक्षण गांधी भवन में दिलाया गया। वहां करीब 70-75 उम्मीदवारों को प्रशिक्षण दिया गया। शेष पांच लाख रुपये प्रशिक्षण के समय ले लिए गए और प्रशिक्षण माह जून 2022 में पूरा करा दिया गया। प्रशिक्षण के बाद एक माह में नियुक्ति पत्र भेजने का आश्वासन दिया गया, लेकिन करीब तीन माह बीतने के बावजूद उन्हें नियुक्ति पत्र नहीं मिला।
विज्ञापन

आरोपी का फोन भी बंद आ रहा है। लखनऊ जाकर पता किया तो बताया गया कि जल निगम द्वारा कोई नियुक्ति नहीं निकाली गई है। सभी कागजात फर्जी बताते हुए आरोपी ने एनजीओ के नाम पर लोगों से धोखाधड़ी करके जल निगम के नाम पर करोड़ों रुपये ठग लिए। इस पूरे मामले की शिकायत करते हुए रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई करने की मांग की गई है। संवाद
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें