न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
हाथरस डिपो भगवान भरोसे चल रहा है। डिपो में एक दर्जन से अधिक बसों के पहिये खामियों के चलते थमे हुए हैं। कार्यशाला में सामान की कमी हो गई है। इस कारण कर्मी बसों को दुरुस्त नहीं कर पा रहे हैं। इसका खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। डिपो के अफसर इससे बेपरवाह बने हैं।
उल्लेखनीय है कि हाथरस डिपो में वर्तमान में 77 बसें हैं। इसमें एक दर्जन बसें काफी पुरानी है। यह बसें बीच रास्ते में यात्रियों का साथ छोड़ देती हैं। अब कार्यशाला में सामान की कमी हो गई है। इस कारण बसों को दुरुस्त नहीं किया जा रहा है। कार्यशाला के कर्मी सामान आने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि दिवाली से पहले बसों को दुरुस्त किया जा सके। वहीं मार्गों पर बसों की कमी के चलते यात्रियों को गंतव्य तक की दूरी तय करने में मुश्किलों से जूझना पड़ रहा है। संवाद
रोडवेज बसों के अभाव में आए-दिन चौराहों पर काफी देर तक खड़ा होना पड़ता है। इस कारण गंतव्य की दूरी तय करने में मुश्किलों से जूझना पड़ रहा है। निगम को बसों की संख्या बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए।
-मुन्ना
रोडवेज बसें काफी जर्जर होने के चलते बीच रास्ते में साथ छोड़ देती हैं। इस कारण आए-दिन धक्का लगाना पड़ता है। इस कारण काफी परेशानी होती है। अधिकारी बसों को दुरुस्त कराने पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
-विजय
रोडवेज में काफी बसें पुरानी हैं। पड़ोसी जिलों में इलेक्ट्रिक बसों का संचालन हो रहा है। यहां पुराने ढर्रे पर रोडवेज की जर्जर बसें चल रही है। यहां नई दिवाली से पहले नई बसें भेजी जाएं, ताकि यात्रियों को राहत मिले।
-चंद्रपाल
सुबह और शाम में काफी काफी देर तक बसों का इंतजार करना पड़ रहा है। विभागीय अधिकारी बसों के संचालन पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। जो बसें चल रही है वह भी बीच रास्ते में आए दिन खराब हो जाती हैं।
-पदम सिंह