न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय का इस जिले के सृजन में अहम योगदान रहा। जिले के सृजन के लिए उन्होंने अपनी कुर्सी भी दांव पर लगा दी। हाथरस को जिला बनवाने का उन्हें राजनीतिक लाभ भी मिला।
रामवीर वर्ष 1996 में जब पहली बार चुनाव लड़े तो उस समय हाथरस को जिला बनाने की मांग काफी मुखर थी। उन्होंने तब लोगों ने वादा किया था कि यदि बसपा की सरकार बनी तो वह हाथरस को जिला बनवा देंगे। रामवीर उपाध्याय चुनाव जीतने के बाद सरकार में मंत्री बन भी गए, लेकिन बसपा-भाजपा गठबंधन की इस सरकार में तब भाजपा के एक बड़े नेता अपने विधानसभा क्षेत्र को जिला बनवाना चाहते थे।
ऐसे में रामवीर उपाध्याय ने अपनी कुर्सी तक दांव पर लगा दी और उपाध्याय ने हाथरस को तीन मई 1997 को जिला बनवाया। हालांकि तब इस जिले का नाम महामायानगर रखा गया। बाद में इसका नाम फिर हाथरस के रूप में परिवर्तित हुआ। इससे उनकी राजनीति चमकी और जिले के लोगों का भरोसा उन्होंने जीत लिया। संवाद